मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच भारत के लिए बड़ी राहत: ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में चल रहे तनावपूर्ण युद्ध के बीच भारत को एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति प्रदान कर दी है। इससे भारत की एलपीजी (एलपीजी) और कच्चे तेल की आपूर्ति पर मंडराया संकट काफी हद तक दूर हो गया है। विशेषज्ञों और अधिकारियों द्वारा इसे भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक और आर्थिक राहत के रूप में देखा जा रहा है।
बता दें कि 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए थे, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे। इसके जवाब में ईरान ने जवाबी कार्रवाई की और होर्मुज स्ट्रेट को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था। इस संकरे समुद्री मार्ग से विश्व का लगभग 20% कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरता है, जिसमें खाड़ी देशों से भारत सहित कई एशियाई देशों की निर्भरता है।
ईरान के इस कदम से जहाजों की आवाजाही ठप हो गई थी, जिसके कारण तेल टैंकर फंस गए थे और वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आया था। भारत के कई जहाज होर्मुज के पास फंसे हुए थे, और भारतीय शिपिंग कंपनियों ने सरकार से नौसेना एस्कॉर्ट की मांग की थी। कुछ रिपोर्टों में ईरान ने पश्चिमी देशों (अमेरिका, इजरायल, यूरोप) के जहाजों को ब्लॉक करने की बात कही थी, जबकि चीन जैसे देशों को विशेष छूट दी गई थी।
हालांकि, ईरान की ओर से भारतीय जहाजों को पास करने की अनुमति मिलने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है। इससे एलपीजी और कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी, जो घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों और महंगाई पर सकारात्मक असर डालेगी।
विदेश मंत्रालय और विशेषज्ञों का मानना है कि यह कूटनीतिक प्रयासों का नतीजा है, जिसमें भारत की तटस्थ स्थिति और संबंधित पक्षों से बातचीत महत्वपूर्ण रही। स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है, लेकिन भारतीय जहाजों के लिए इस राहत से तत्काल संकट टल गया है।
