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लद्दाख प्रशासन में बड़ा रिव्यू: 100 करोड़ तक की योजनाओं की मंजूरी अब सीधे गृह मंत्रालय देगा

New Delhi : केंद्र सरकार ने लद्दाख प्रशासन से बड़ी परियोजनाओं की वित्तीय मंजूरी की शक्तियाँ वापस ले ली हैं। अब 100 करोड़ रुपये तक की नई योजनाओं की स्वीकृति सीधे गृह मंत्रालय देगा। LG बीडी मिश्रा ने आदेश जारी किए, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गए। इससे प्रशासनिक नियंत्रण केंद्र के अधीन और मजबूत हुआ है।

 
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New Delhi : केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लद्दाख प्रशासन में बड़ा बदलाव करते हुए लेफ्टिनेंट गवर्नर (LG) समेत सभी वरिष्ठ अधिकारियों से बड़ी परियोजनाओं की वित्तीय मंजूरी की शक्तियाँ वापस ले ली हैं। अब 100 करोड़ रुपये तक की किसी भी नई योजना या परियोजना को मंजूरी देने का अधिकार सीधे गृह मंत्रालय के पास होगा।

लद्दाख के LG ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) बीडी मिश्रा (नोट: वर्तमान LG का नाम कविंदर गुप्ता नहीं, गलत जानकारी थी) ने गृह मंत्रालय के निर्देश पर इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

मुख्य बदलाव:

- पहले LG 100 करोड़ तक (PPP सहित) परियोजनाओं को मंजूरी दे सकते थे → अब यह अधिकार पूरी तरह MHA को।
- प्रशासनिक सचिवों की 20 करोड़ तक की मंजूरी की शक्ति खत्म।
- चीफ इंजीनियर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर व HoD की 3-10 करोड़ तक की शक्तियाँ समाप्त।
- डिप्टी कमिश्नर व डेवलपमेंट विभाग प्रमुख की 5 करोड़ तक की मंजूरी की शक्ति भी वापस।

लेह हिल काउंसिल का कार्यकाल 2020 में खत्म होने के बाद चुनाव नहीं हुए, जिससे उसकी शक्तियाँ DC लेह को दे दी गई थीं। कारगिल हिल काउंसिल मौजूद है, लेकिन दोनों जगह CEO के रूप में काम कर रहे अधिकारियों से प्रभावी निर्णय नहीं हो पा रहे थे। प्रशासनिक जटिलताओं व देरी को देखते हुए केंद्र ने सभी बड़े वित्तीय फैसले अपने हाथ में ले लिए।

छोटे-मोटे खर्च ही स्थानीय स्तर पर मंजूर होंगे:

- LG → आकस्मिक व विविध व्यय (बजट सीमा में)
- चीफ सेक्रेटरी → 1 करोड़ तक
- वित्त सचिव → 75 लाख तक
- प्रशासनिक सचिव → 50 लाख तक
- HoD → 30 लाख तक

पहले से मंजूर, टेंडर हो चुके या चल रहे प्रोजेक्ट पुरानी व्यवस्था से ही चलते रहेंगे। सरकार का कहना है कि यह कदम पारदर्शिता, तेज निर्णय और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। लद्दाख में लोकतांत्रिक संस्थाओं की अनुपस्थिति के बीच केंद्र ने सीधा नियंत्रण मजबूत कर लिया है।