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BRICS Summit: PM मोदी ने Global South को लेकर दिया बड़ा संदेश, कहा- ‘Rule Taker’ नहीं ‘Rule Shaper’ बनें

BRICS Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को ‘Rule Taker’ नहीं बल्कि ‘Rule Shaper’ बनना होगा। BRICS अध्यक्ष के तौर पर मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने पर भारत के नेतृत्व का संकेत दिया।
 
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BRICS Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में ग्लोबल साउथ की भूमिका को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विकासशील और आर्थिक रूप से कमजोर देशों को वैश्विक व्यवस्था में सिर्फ नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि नियमों को आकार देने वाला यानी ‘Rule Shaper’ बनना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए नेतृत्व करने को तैयार है।

Global South को मिलेगी ज्यादा मजबूत आवाज

BRICS Summit की अध्यक्षता करते हुए PM मोदी के शुरुआती संबोधन का केंद्र ग्लोबल साउथ को वैश्विक व्यवस्था में अधिक प्रभावशाली आवाज दिलाना रहा। उन्होंने कहा कि दुनिया के विकासशील देशों को अपनी जरूरतों और हितों के मुताबिक वैश्विक नीतियों और फैसलों को आकार देने में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए।

प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब BRICS को ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के तौर पर देखा जा रहा है। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में 18वां BRICS Summit आयोजित किया जा रहा है।

‘Rule Taker’ से ‘Rule Shaper’ बनने की जरूरत

PM मोदी ने अपने संबोधन में ग्लोबल साउथ की स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि इन देशों को केवल पहले से तय वैश्विक नियमों को स्वीकार करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनकी भूमिका ऐसी होनी चाहिए कि वे खुद वैश्विक नियमों और नीतियों को तय करने की प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी करें।

यानी प्रधानमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि ग्लोबल साउथ को ‘Rule Taker’ से ‘Rule Shaper’ बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इसके लिए भारत अपनी भूमिका को सक्रिय रूप से आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।

‘सत्ता की पिरामिड’ से ‘साझेदारी के मंच’ तक

प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन का एक प्रमुख संदेश वैश्विक शासन व्यवस्था में बदलाव को लेकर था। उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को सत्ता और प्रभाव के केंद्रीकरण से जोड़ते हुए ऐसी व्यवस्था की जरूरत बताई जिसमें ज्यादा से ज्यादा देशों की भागीदारी हो।

इसी सोच को उन्होंने ‘pyramid of power’ से ‘platform of partnership’ यानी सत्ता की पिरामिड से साझेदारी के मंच तक पहुंचने के विचार के रूप में सामने रखा। इसका सीधा मतलब यह है कि वैश्विक फैसलों में कुछ शक्तिशाली देशों के प्रभुत्व के बजाय विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को भी पर्याप्त जगह मिले।

भारत नेतृत्व करने के लिए तैयार

PM मोदी ने साफ संकेत दिया कि भारत ग्लोबल साउथ को अधिक प्रभावशाली भूमिका दिलाने की कोशिशों में नेतृत्व करने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज को वैश्विक शासन व्यवस्था में ज्यादा मजबूती से सामने लाने की जरूरत है।

भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान इस मुद्दे को प्रमुखता दिए जाने को नई दिल्ली की व्यापक कूटनीतिक प्राथमिकताओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

BRICS Summit में Global South पर फोकस

18वें BRICS Summit में ग्लोबल साउथ का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि BRICS अब सिर्फ पारंपरिक उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह नहीं रह गया है। इसके विस्तार के बाद इसमें कई विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हुई हैं।

ऐसे में भारत की अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल साउथ की आवाज को BRICS के मंच से मजबूती देना प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। उनका संदेश साफ था कि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव केवल आर्थिक ताकत के आधार पर नहीं, बल्कि व्यापक और बराबर की साझेदारी के आधार पर होना चाहिए।