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Budget 2026-27: NBFC और माइक्रोफाइनेंस के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की तैयारी

बजट 2026-27 में सरकार NBFC, MSME और माइक्रोफाइनेंस के जरिए ग्रामीण मांग बढ़ाने की तैयारी में है। सस्ता कर्ज, मुद्रा योजना विस्तार और रेंटल हाउसिंग मिशन पर खास फोकस रहेगा।

 
Budget 2026-27
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Budget 2026-27: आर्थिक सुधारों के एक वर्ष बाद अब सरकार का पूरा ध्यान ग्रामीण मांग को मजबूत करने पर केंद्रित हो गया है, ताकि देश की आर्थिक विकास दर की रफ्तार को बनाए रखा जा सके। इसी दिशा में वित्त वर्ष 2026-27 के आम बजट में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के लिए कई सकारात्मक और प्रोत्साहनात्मक घोषणाएं किए जाने की तैयारी है।

सरकार का फोकस खासतौर पर एमएसएमई, ग्रामीण उद्यमियों और कम आय वर्ग को किफायती दरों पर कर्ज उपलब्ध कराने पर रहेगा। दूर-दराज के इलाकों में स्थित छोटे और मझोले कारोबारियों को आसान वित्तीय सहायता देने के लिए ऋण प्रक्रियाओं को सरल बनाने और मुद्रा योजना के विस्तार पर भी जोर दिया जाएगा।

बताया जा रहा है कि ये प्रस्ताव हाल ही में आरबीआई और वित्त मंत्रालय के बीच हुई विशेष समीक्षा बैठक में मिले सुझावों पर आधारित हैं। इसके तहत NBFC को फंड उपलब्ध कराने के लिए विशेष कोष की स्थापना, रिफाइनेंस विंडो और सस्ती पूंजी उपलब्ध कराने जैसे कदम सरकार के एजेंडे में शामिल हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में NBFC सेक्टर में आई चुनौतियों को आरबीआई ने मजबूत निगरानी तंत्र के जरिए काफी हद तक सुलझा लिया है। अब केंद्रीय बैंक भी NBFC को आर्थिक वृद्धि का अहम स्तंभ मानते हुए उन्हें प्रोत्साहित कर रहा है।

पिछले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा की गई घोषणाओं का असर अब साफ दिखने लगा है। कुल खुदरा ऋण में NBFC की हिस्सेदारी बढ़कर 58 प्रतिशत तक पहुंच गई है। खासकर दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों में NBFC द्वारा वितरित कर्ज की रफ्तार वाणिज्यिक बैंकों से तेज रही है।

रेंटल हाउसिंग के लिए राष्ट्रीय मिशन की मांग

रियल एस्टेट डेवलपर्स की प्रमुख संस्था क्रेडाई ने सरकार से मांग की है कि आगामी बजट में रेंटल हाउसिंग के लिए राष्ट्रीय मिशन शुरू किया जाए। इसमें डेवलपर्स और किरायेदारों दोनों को टैक्स छूट दी जाए। साथ ही किफायती आवास की परिभाषा में 45 लाख रुपये की सीमा और क्षेत्रफल मानकों को बनाए रखने की भी मांग की गई है।

क्रेडाई ने होम लोन पर ब्याज कटौती की सीमा को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का सुझाव भी दिया है।

माइक्रोफाइनेंस की अहम भूमिका

डीजेटी माइक्रोफाइनेंस के सीओओ अविनाश कुमार ने कहा कि बजट में MSME और कम आय वर्ग के लिए सस्ता व आसान कर्ज सुनिश्चित करने की जरूरत है। उन्होंने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और माइक्रोफाइनेंस संस्थाओं के लिए पूंजी लागत कम करने की भी मांग की। उनके अनुसार, मुद्रा योजना का विस्तार और कर्ज योजनाओं को सरल बनाकर बैलेंस शीट पर दबाव घटाया जा सकता है और ज्यादा लोगों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।