क्या BP की दवा से बढ़ सकता है कैंसर का खतरा! WHO की रिपोर्ट ने चौंकाया
ब्लड प्रेशर यानी हाई बीपी की दवा लेने वाले लोगों के लिए एक अहम रिपोर्ट सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की कैंसर रिसर्च एजेंसी IARC ने हाइड्रोक्लोरोथायाजाइड, वोरिकोनाजोल और टैक्रोलिमस से जुड़े उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों की समीक्षा के बाद इन्हें ग्रुप-1 कार्सिनोजेन की श्रेणी में रखा है। इन तीनों दवाओं का इस्तेमाल अलग-अलग बीमारियों के इलाज में किया जाता है।
इनमें हाइड्रोक्लोरोथायाजाइड हाई ब्लड प्रेशर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा है। रिपोर्ट सामने आने के बाद इसे लेने वाले लोगों के बीच स्वाभाविक तौर पर चिंता बढ़ी है। हालांकि, विशेषज्ञों की इस तरह की वर्गीकरण का मतलब यह नहीं है कि दवा लेने वाले हर व्यक्ति को कैंसर हो जाएगा।
IARC के ग्रुप-1 का क्या मतलब है?
IARC किसी पदार्थ या दवा को उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखता है। ग्रुप-1 का अर्थ है कि संबंधित पदार्थ के इंसानों में कैंसर पैदा करने की क्षमता के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति में कैंसर का खतरा समान होगा। जोखिम कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे दवा कितनी मात्रा में ली जा रही है, कितने लंबे समय तक इस्तेमाल हो रहा है और व्यक्ति की अन्य स्वास्थ्य स्थितियां क्या हैं।
हाइड्रोक्लोरोथायाजाइड को लेकर क्या चिंता है?
हाइड्रोक्लोरोथायाजाइड का इस्तेमाल हाई बीपी को नियंत्रित करने के साथ शरीर में जमा अतिरिक्त पानी को कम करने के लिए भी किया जाता है। कई मरीजों को यह दवा दूसरी ब्लड प्रेशर की दवाओं के साथ दी जाती है।
IARC की समीक्षा में लंबे समय तक हाइड्रोक्लोरोथायाजाइड के इस्तेमाल और त्वचा के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा तथा होंठ के कैंसर के बीच संबंध के पर्याप्त प्रमाण पाए गए हैं।
इस दवा को लेकर एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि यह त्वचा को सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणों के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकती है। ऐसे में लंबे समय तक धूप के संपर्क में रहने वाले लोगों के लिए त्वचा की सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
हाइड्रोक्लोरोथायाजाइड को पहले कैंसर के लिहाज से कम मजबूत श्रेणी में रखा गया था। नए वैज्ञानिक प्रमाणों की समीक्षा के बाद इसकी श्रेणी को बढ़ाकर ग्रुप-1 किया गया है। इसके लिए इंसानों पर किए गए अध्ययनों के साथ-साथ अन्य वैज्ञानिक आंकड़ों की भी समीक्षा की गई।
वोरिकोनाजोल क्या है?
वोरिकोनाजोल का इस्तेमाल हाई बीपी के इलाज में नहीं होता। यह एक एंटीफंगल दवा है, जिसका इस्तेमाल गंभीर फंगल संक्रमण के इलाज में किया जाता है। खासतौर पर कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीजों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
IARC की समीक्षा में वोरिकोनाजोल के इस्तेमाल और स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के बीच भी पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण पाए गए हैं। इसके इस्तेमाल के दौरान धूप से त्वचा को होने वाले नुकसान को लेकर भी सावधानी जरूरी मानी गई है।
टैक्रोलिमस का इस्तेमाल क्यों होता है?
टैक्रोलिमस भी ब्लड प्रेशर की दवा नहीं है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से अंग प्रत्यारोपण के बाद किया जाता है। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने का काम करता है, ताकि शरीर नए अंग को अस्वीकार न करे।
IARC के अनुसार, शरीर के अंदर इस्तेमाल किए जाने वाले टैक्रोलिमस और कुछ प्रकार के कैंसर के बीच भी पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण मिले हैं। इनमें नॉन-हॉजकिन लिंफोमा और कुछ प्रकार के त्वचा कैंसर शामिल हैं।
क्या BP की दवा तुरंत बंद कर देनी चाहिए?
नहीं। इस रिपोर्ट के बाद अपनी ब्लड प्रेशर की दवा खुद से बंद करना सही नहीं है। हाई बीपी को बिना इलाज के छोड़ना स्ट्रोक, हार्ट अटैक और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है।
अगर आपकी दवा में हाइड्रोक्लोरोथायाजाइड शामिल है और आपको इसे लेकर चिंता है, तो अपने डॉक्टर से सलाह लें। आपकी उम्र, बीपी, अन्य दवाओं और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए डॉक्टर तय कर सकते हैं कि दवा जारी रखनी है या कोई दूसरा विकल्प बेहतर रहेगा।
लंबे समय से दवा ले रहे हैं तो धूप से बचाव भी जरूरी
हाइड्रोक्लोरोथायाजाइड लेने वाले लोगों को खासतौर पर लंबे समय तक तेज धूप में रहने से बचना चाहिए। बाहर निकलते समय शरीर को ढककर रखना और धूप से बचाव के सामान्य उपाय अपनाना उपयोगी हो सकता है।
सबसे जरूरी बात: IARC की रिपोर्ट दवाओं के संभावित कैंसर जोखिम से जुड़े वैज्ञानिक प्रमाणों के बारे में है। इसका मतलब यह नहीं है कि दवा लेने वाला हर व्यक्ति कैंसर की चपेट में आएगा। इसलिए घबराने के बजाय अपनी दवा को लेकर डॉक्टर से उचित सलाह लेना बेहतर है।
