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वंदे मातरम्' के 150 वर्ष का उत्सव: बर्दवान में दो दिनी अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, देश-विदेश के विद्वान हुए शामिल

 
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पश्चिम बंगाल के बर्दवान स्थित महाराजाधिराज उदय चंद महिला महाविद्यालय में मंगलवार को 'राष्ट्र की कथा : औपनिवेशिक भारत में साहित्य और राष्ट्रीय चेतना वंदे मातरम् के 150 वर्ष का उत्सव' विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी का आयोजन महाविद्यालय के इतिहास विभाग और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) द्वारा हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा के सहयोग से किया जा रहा है।

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इस संगोष्ठी को भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), पूर्वी क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता द्वारा शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से प्रायोजित किया गया है। कार्यक्रम महाविद्यालय के एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता बर्दवान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) शंकर कुमार नाथ ने की। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. असरफी खातून, इतिहासकार प्रो. प्रोजित कुमार पालित, प्रो. अपराजिता धर, मॉरीशस से डॉ. गिरजनंद सिंह बिसेसुर, डॉ. निशा ठाकुर, डॉ. हेमंत साहा सहित देश-विदेश के अनेक शिक्षाविद, शोधकर्ता और अकादमिक विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत 'वंदे मातरम्' के सामूहिक गायन, दीप प्रज्ज्वलन, अतिथियों के स्वागत और संगोष्ठी की सार-संग्रह पुस्तिका के विमोचन के साथ हुई।

संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य औपनिवेशिक भारत में राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में साहित्य की भूमिका का अध्ययन करना तथा 'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर उसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक महत्व पर व्यापक विमर्श करना है।

दो दिवसीय आयोजन के दौरान साहित्य, राष्ट्रवाद, मुद्रण संस्कृति, औपनिवेशिक विरोधी आंदोलन, सांस्कृतिक पहचान और अंतःविषयक अध्ययन जैसे विषयों पर मुख्य व्याख्यान, पूर्ण सत्र और शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।

इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों के अलावा नेपाल और मॉरीशस के प्रतिभागी भी ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से शामिल हो रहे हैं। आयोजन के दौरान 80 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।

आयोजकों ने उम्मीद जताई कि यह संगोष्ठी साहित्य, इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े विषयों पर सार्थक शैक्षणिक संवाद को नई दिशा देने के साथ-साथ शोध कार्यों को भी प्रोत्साहित करेगी।