कॉकरोच’ टिप्पणी पर CJI सूर्य कांत का स्पष्टीकरण, बोले- युवाओं नहीं, फर्जी डिग्री वालों...
New Delhi : सूर्य कांत ने ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ संबंधी टिप्पणी को लेकर उठे विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और उनका उद्देश्य देश के युवाओं का अपमान करना नहीं था।
सीजेआई की ओर से जारी बयान में कहा गया कि उनकी टिप्पणी उन लोगों के लिए थी जो फर्जी डिग्रियों के जरिए वकालत, मीडिया और अन्य सम्मानित पेशों में प्रवेश कर ईमानदार युवाओं के अवसर छीन रहे हैं।
“युवाओं पर गर्व है”
सूर्य कांत ने कहा कि मीडिया के कुछ हिस्सों ने मेरी बात को गलत तरीके से पेश किया। मैंने देश के युवाओं की आलोचना नहीं की थी। मैं उन लोगों की बात कर रहा था जो जाली डिग्रियों के सहारे सम्मानित पेशों में घुस आए हैं। ऐसे लोग समाज के लिए परजीवी हैं। मुझे भारत की युवा पीढ़ी पर गर्व है और मैं युवाओं को देश की असली ताकत मानता हूं।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान और आने वाली युवा पीढ़ी “विकसित भारत” की सबसे मजबूत आधारशिला है।
सुनवाई के दौरान दिया था बयान
दरअसल, 15 मई को सुप्रीम कोर्ट में हुई एक सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्य कांत एक याचिकाकर्ता पर नाराज हो गए थे, जिसने खुद को ‘वरिष्ठ वकील’ का दर्जा नहीं दिए जाने को चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा था कि ‘वरिष्ठ वकील’ का पद कोई सजावटी उपाधि नहीं है। इसी दौरान उन्होंने Bar Council of India की आलोचना करते हुए कहा था कि संस्था फर्जी डिग्रियों के जरिए पेशे में आने वाले लोगों की पर्याप्त जांच नहीं करती।
इसी क्रम में उन्होंने कुछ लोगों को “कॉकरोच” और “परजीवी” कहकर संबोधित किया था, जिसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में विवाद शुरू हो गया।
बयान पर बढ़ा था विवाद
सीजेआई की टिप्पणी को लेकर कई लोगों ने इसे बेरोजगार युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का अपमान बताया था। विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी बयान की आलोचना की थी।
हालांकि अब स्पष्टीकरण जारी करते हुए सीजेआई सूर्य कांत ने साफ किया है कि उनकी टिप्पणी का निशाना युवा नहीं, बल्कि फर्जी पहचान और नकली योग्यता के सहारे पेशों में प्रवेश करने वाले लोग थे।
