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CJI सूर्यकांत का फूटा गुस्सा! छात्र को 5 लाख का नोटिस देख बोले- मजिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत कैसे हुई?
 

 
CJI सूर्यकांत का फूटा गुस्सा! छात्र को 5 लाख का नोटिस देख बोले- मजिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत कैसे हुई?
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नोएडा। गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को ₹5 लाख के पर्सनल बॉन्ड का नोटिस जारी किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। छात्र को नोटिस दिए जाने पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोएडा प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई।

मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही संबंधित विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर को रद्द कर चुका था और छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का आदेश था, तो एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने नोटिस कैसे जारी कर दिया।

‘मजिस्ट्रेट में इतनी हिम्मत कैसे हुई?’

सीजेआई सूर्यकांत ने कथित तौर पर सख्त टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश मौजूद था, तो मजिस्ट्रेट ने उसके बावजूद छात्र को नोटिस कैसे जारी किया। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले में संबंधित मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि छात्र को जारी किया गया नोटिस बाद में वापस ले लिया गया है। हालांकि, कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए नोटिस को रिकॉर्ड पर लाने के लिए याचिका दाखिल करने को कहा।

छात्र से मांगा गया था ₹5 लाख का बॉन्ड

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सीनियर एडवोकेट विश्वजीत भट्टाचार्य ने सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने यह मामला उठाया। उन्होंने बताया कि ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के सेकंड ईयर के छात्र अक्षत त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

नोटिस में छात्र से पूछा गया था कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उससे ₹5 लाख का पर्सनल बॉन्ड क्यों न भरवाया जाए। इसके अलावा ₹5-5 लाख की दो जमानतें देने की बात भी नोटिस में कही गई थी।

पुलिस रिपोर्ट के आधार पर हुई थी कार्रवाई

बताया गया है कि 4 सितंबर 2026 को जारी नोटिस की कार्रवाई पुलिस रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई थी। इसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं 126 और 135 के तहत कार्रवाई का उल्लेख था।

पुलिस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि अक्षत त्रिपाठी छात्रों के बीच कथित तौर पर सरकार-विरोधी और गुमराह करने वाली बातें फैला रहे थे और उन्हें प्रस्तावित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित कर रहे थे।

‘छात्रों में डर का माहौल बन सकता है’

छात्र की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि इस तरह की कार्रवाई से छात्रों के बीच डर का माहौल पैदा हो सकता है। उन्होंने इस कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना के बराबर बताया।