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गाजियाबाद में जैन मंदिर के उद्घाटन में CM योगी का ऐलान - फाजिल नगर का नाम होगा पावा नगरी

Lucknow : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद में भगवान पार्श्वनाथ जी की मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम और मंदिर उद्घाटन में शामिल हुए। उन्होंने जैन धर्म और राज्य की सांस्कृतिक विरासत पर चर्चा की। फाजिल नगर का नाम पावा नगरी करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई, जहां महावीर का महापरिनिर्वाण हुआ।

 
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Lucknow : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को गाजियाबाद पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान पार्श्वनाथ जी की नई स्थापित मूर्ति का प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम और मंदिर के उद्घाटन में शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने जैन धर्म, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से अपनी बात रखी।

फाजिल नगर का नाम पावा नगरी किया जा रहा है

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने बताया कि जहां भगवान महावीर ने अपना महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था, उस फाजिल नगर का नाम बदलकर पावा नगरी करने की प्रक्रिया सरकार ने शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि महावीर का जन्म भले वैशाली में हुआ हो, लेकिन उनकी अंतिम यात्रा उत्तर प्रदेश की पावन भूमि पर पूरी हुई।

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मुख्यमंत्री ने कहा - 

- उत्तर प्रदेश का सौभाग्य है कि प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का जन्म यहीं हुआ।

- अयोध्या में चार जैन तीर्थंकर अवतरित हुए और काशी जैसे पवित्र नगर में भी चार जैन तीर्थंकरों का अवतरण हुआ।

उन्होंने बताया कि हाल ही में श्रावस्ती यात्रा के दौरान उन्हें पता चला कि भगवान संभवनाथ का जन्म भी श्रावस्ती की धरती पर हुआ था।

भारत की परंपरा त्याग और बलिदान की महागाथा

सीएम योगी ने कहा कि भारत की अध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा वेदों, ऋषियों, संतों और मुनियों के तप, त्याग और बलिदान से बनी है। उन्होंने कहा कि यह महागाथा किसी एक युग की नहीं, बल्कि युगों-युगों से मानवता को प्रेरित करती रही है।

मुख्यमंत्री योगी ने तीन दिन पहले अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य की पूर्णाहुति का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करकमलों से राम जन्मभूमि मंदिर पर भव्य भगवा ध्वज का आरोहण होना पूरे देश के लिए गौरव का विषय है।

उन्होंने कहा कि पूरा देश और दुनिया इस ऐतिहासिक क्षण की भव्यता, आध्यात्मिकता और सनातन संस्कृति की शक्ति को देख रही है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।