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चुनाव आयोग के खिलाफ सड़कों पर कांग्रेस, गोगोई हिरासत में; पटना-चंडीगढ़ में वाटर कैनन
 

 
 चुनाव आयोग के खिलाफ सड़कों पर कांग्रेस, गोगोई हिरासत में; पटना-चंडीगढ़ में वाटर कैनन
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नई दिल्ली। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कई राज्यों में प्रदर्शन किया। असम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया, जबकि पटना और चंडीगढ़ में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।

दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई। यहां भारतीय युवा कांग्रेस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने SIR तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध जताया।

14 बार आपत्ति जताने की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद

विवाद की पृष्ठभूमि में द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए Form-6 में बदलाव, मतदाता नामों को जोड़ने और हटाने, चुनावी डेटाबेस तक पहुंच तथा SIR से जुड़ी प्रक्रियाएं शामिल थीं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनावी डेटाबेस के नियंत्रण के बढ़ते केंद्रीकरण को लेकर सवाल उठाए थे। हालांकि, इन रिपोर्टेड आपत्तियों को लेकर चुनाव आयोग ने अलग तस्वीर पेश की है।

राहुल गांधी ने लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस विवाद के बीच चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव समेत कई चुनावों में धांधली हुई और चुनावी प्रक्रिया पर हमला लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। ये राजनीतिक आरोप हैं, जिनका चुनाव आयोग ने समर्थन नहीं किया है।

ECI का जवाब- सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से

चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद या फैसलों में असहमति के दावों को खारिज किया है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, SIR समेत सभी अंतिम निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग का कहना है कि किसी बहु-सदस्यीय संस्था में अधिकारियों द्वारा सुझाव, आपत्तियां या प्रशासनिक फीडबैक देना प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इससे अंतिम निर्णय पर असहमति साबित नहीं होती।

इस बीच, SIR को लेकर विवाद और राजनीतिक प्रदर्शन जारी रहने से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के प्रबंधन और आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया पर सार्वजनिक बहस और तेज हो गई है।