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‘अहीर-जहीर को कंट्रोल कीजिए अखिलेश भाई...ओपी राजभर का सपा प्रमुख पर तीखा हमला, दे डाली ये नसीहत

 
OP Rajbhar
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लखनऊ। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा सियासी हमला बोला है। प्रदेश में सामने आई हालिया आपराधिक घटनाओं का जिक्र करते हुए राजभर ने अखिलेश यादव को अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं पर नियंत्रण रखने की नसीहत दी है।
 

ओपी राजभर ने एक्स पर पोस्ट कर बोला हमला

ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि, “अखिलेश भाई अपने ‘अहीर’ और ‘जहीर’ को कंट्रोल कीजिए महाराज। ये बहुत अति मचाए हुए हैं। समाज का तो अहित कर ही रहे हैं, आपको भी ये निपटा देंगे।”

राजभर ने अपने बयान में झांसी की एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि वहां एक सरकारी शिक्षक, जिसे उन्होंने अखिलेश यादव के ‘अहीर’ के रूप में संबोधित किया, ने बनिया समाज के एक व्यापारी का अपहरण किया। राजभर ने कहा कि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

इसके साथ ही उन्होंने हापुड़ की एक घटना का भी उल्लेख किया और दावा किया कि गोकशी के मामले में एक आरोपी पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया है। राजभर ने इन घटनाओं को लेकर समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए अपने कार्यकर्ताओं पर नियंत्रण रखने की बात कही।

कैबिनेट मंत्री ने आगे आरोप लगाया कि कुछ अपराधियों को राष्ट्रीय सुहेलदेव सेना की यूनिफॉर्म की नकल करते हुए नीली ड्रेस पहनाई गई है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें सुहेलदेव सेना की तरह अनुशासन नहीं सिखाया जा सकता तो कम से कम पार्टी नेतृत्व को उनसे अपराध न करने की शपथ दिलानी चाहिए।

राजभर ने अपने पोस्ट में अखिलेश यादव को 2027 के विधानसभा चुनाव का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव ने अपने ‘अहीर’ और ‘जहीर’ पर नियंत्रण नहीं किया तो ये लोग उनकी पार्टी को 2027 के विधानसभा चुनाव में 27 सीटें भी नहीं जीतने देंगे।

अपने पोस्ट के अंत में ओम प्रकाश राजभर ने “जय भारत, जय श्रीराम, जय श्री कृष्ण, जय परशुराम, जय महाराज सुहेलदेव” के नारे भी लिखे।


राजभर का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो रही है। उनके इस बयान को समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर सीधे राजनीतिक हमले के तौर पर देखा जा रहा है।