लालू यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका, इस मामले में याचिका खारिज
Mar 24, 2026, 16:46 IST
WhatsApp Channel
Join Now
Facebook Profile
Join Now
Instagram Profile
Join Now
नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख Lalu Prasad Yadav को मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने ‘नौकरी के बदले जमीन’ मामले में सीबीआई की प्राथमिकी और आरोपपत्र को रद्द करने की उनकी याचिका खारिज कर दी।
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस रविंदर डुडेजा ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है। लालू यादव ने अपनी याचिका में वर्ष 2022, 2023 और 2024 में दाखिल आरोपपत्रों के साथ-साथ मामले में संज्ञान लेने के आदेशों को भी रद्द करने की मांग की थी।
कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
लालू यादव की ओर से दलील दी गई थी कि सीबीआई ने जांच और मुकदमा चलाने से पहले आवश्यक सरकारी मंजूरी नहीं ली, जो कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जरूरी है। हालांकि अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई दम नहीं है और मामले को रद्द नहीं किया जा सकता।
क्या है ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामला?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि उस दौरान भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन (जबलपुर) में ग्रुप-डी की नौकरियां देने के बदले लोगों से जमीन ली गई।
जांच एजेंसियों के अनुसार, कई नियुक्तियां कथित तौर पर उन लोगों को दी गईं, जिन्होंने लालू यादव के परिवार या करीबी सहयोगियों के नाम पर जमीन गिफ्ट या ट्रांसफर की थी।
2022 में दर्ज हुआ था केस
सीबीआई ने 18 मई 2022 को इस मामले में केस दर्ज किया था। इसमें लालू यादव के साथ उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटियां, कुछ सरकारी अधिकारी और अन्य निजी व्यक्ति भी आरोपी बनाए गए हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस रविंदर डुडेजा ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि याचिका में कोई ठोस आधार नहीं है, इसलिए इसे खारिज किया जाता है। लालू यादव ने अपनी याचिका में वर्ष 2022, 2023 और 2024 में दाखिल आरोपपत्रों के साथ-साथ मामले में संज्ञान लेने के आदेशों को भी रद्द करने की मांग की थी।
कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
लालू यादव की ओर से दलील दी गई थी कि सीबीआई ने जांच और मुकदमा चलाने से पहले आवश्यक सरकारी मंजूरी नहीं ली, जो कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जरूरी है। हालांकि अदालत ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई दम नहीं है और मामले को रद्द नहीं किया जा सकता।
क्या है ‘जमीन के बदले नौकरी’ मामला?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि उस दौरान भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन (जबलपुर) में ग्रुप-डी की नौकरियां देने के बदले लोगों से जमीन ली गई।
जांच एजेंसियों के अनुसार, कई नियुक्तियां कथित तौर पर उन लोगों को दी गईं, जिन्होंने लालू यादव के परिवार या करीबी सहयोगियों के नाम पर जमीन गिफ्ट या ट्रांसफर की थी।
2022 में दर्ज हुआ था केस
सीबीआई ने 18 मई 2022 को इस मामले में केस दर्ज किया था। इसमें लालू यादव के साथ उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटियां, कुछ सरकारी अधिकारी और अन्य निजी व्यक्ति भी आरोपी बनाए गए हैं।
