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दिल्ली से वाराणसी सिर्फ 3 घंटे 50 मिनट में, रेलवे ला रहा नया हाईस्पीड कॉरिडोर

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि आने वाले वर्षों में भारत की ट्रेन सेवाएं कई मार्गों पर हवाई यात्रा से भी तेज और सुविधाजनक हो जाएंगी। दिल्ली-वाराणसी, दिल्ली-लखनऊ, मुंबई-पुणे और बंगलूरू-चेन्नई जैसे रूट्स पर यात्रा समय में भारी कमी आने वाली है।

 
दिल्ली से वाराणसी
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भारतीय रेलवे आने वाले समय में देश की यात्रा व्यवस्था की तस्वीर बदलने की तैयारी में है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि तेजी से विकसित हो रहे नए रेल कॉरिडोर और हाईस्पीड नेटवर्क के बाद कई प्रमुख मार्गों पर ट्रेनें हवाई यात्रा से ज्यादा सुविधाजनक और प्रभावी साबित होंगी। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली से वाराणसी का सफर केवल 3 घंटे 50 मिनट में और दिल्ली से लखनऊ की यात्रा करीब 2 घंटे में पूरी की जा सकेगी।

कई शहरों के बीच घटेगा यात्रा समय

रेल मंत्री ने बताया कि रेलवे का फोकस अब ऐसे हाईस्पीड और आधुनिक रेल नेटवर्क पर है, जिससे बड़े शहरों के बीच यात्रा का समय बेहद कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगलूरू और चेन्नई के बीच सफर घटकर सिर्फ 78 मिनट रह जाएगा। इससे दोनों शहर लगभग एक संयुक्त महानगर की तरह जुड़ जाएंगे।

इसी तरह मुंबई और पुणे के बीच नया रेल गलियारा विकसित किया जा रहा है, जहां यात्रा समय केवल 28 मिनट तक सीमित हो सकता है। वहीं पुणे से हैदराबाद का सफर करीब 1 घंटा 55 मिनट और हैदराबाद से बंगलूरू की दूरी लगभग 2 घंटे में पूरी करने की योजना है।

इन रूट्स पर फ्लाइट्स को लोग नहीं देंगे तवज्जो

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भविष्य में ऐसे कई रूट होंगे जहां लोग हवाई यात्रा की बजाय ट्रेन को प्राथमिकता देंगे। उनका कहना था कि जब यात्रा समय इतना कम हो जाएगा और रेलवे सुविधाएं बेहतर होंगी, तब इन मार्गों पर विमान सेवाओं की मांग काफी घट सकती है।

उन्होंने यहां तक कहा कि जो लोग एयरलाइन सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं, उन्हें आने वाले बदलावों को समझना चाहिए क्योंकि इन रूट्स पर बड़ी संख्या में यात्री रेलवे की ओर शिफ्ट हो सकते हैं।

रेलवे नेटवर्क विस्तार पर जोर

रेल मंत्री ने बताया कि देश में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से मजबूत किया जा रहा है। अब तक लगभग 49 हजार किलोमीटर रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण पूरा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह जर्मनी के पूरे रेल नेटवर्क से भी अधिक है।

इसके अलावा करीब 36 हजार किलोमीटर नई रेलवे लाइनें बिछाई गई हैं, जो स्विट्जरलैंड के रेल नेटवर्क से लगभग छह गुना बताई जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य रेलवे को अधिक तेज, आधुनिक और ऊर्जा-कुशल बनाना है।

पूंजीगत व्यय पर भी दिया अपडेट

अश्विनी वैष्णव ने रेलवे परियोजनाओं पर हो रहे खर्च का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में रेलवे का लगभग पूरा पूंजीगत व्यय मार्च के पहले सप्ताह तक खर्च हो चुका था। फरवरी के अंतिम सप्ताह तक 98 प्रतिशत से अधिक राशि उपयोग में लाई जा चुकी थी। उन्होंने कहा कि वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए बाद में व्यय की गति को नियंत्रित किया गया, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की रफ्तार लगातार जारी है।

हाईस्पीड रेल नेटवर्क से बदल सकती है यात्रा संस्कृति

रेलवे मंत्रालय का मानना है कि तेज रफ्तार रेल नेटवर्क न केवल यात्रा समय कम करेगा बल्कि आर्थिक गतिविधियों और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को भी नई दिशा देगा। बड़े शहरों के बीच तेज संपर्क से कारोबार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों में भी तेजी आने की उम्मीद है।