दो बार इस्तीफा देने की पेशकश, लेकिन मंजूरी नहीं मिली... फिर अचानक क्या बदला कि धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर नई जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने अंतिम इस्तीफे से पहले दो बार पद छोड़ने की पेशकश की थी, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। जानिए किन परिस्थितियों में आखिरकार उनका इस्तीफा मंजूर हुआ और इसके पीछे क्या वजह रही।
Dharmendra Pradhan Resignation: केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक राजनीतिक फैसला नहीं था, बल्कि इसके पीछे कई दिनों तक चली अंदरूनी बातचीत, लगातार बढ़ता दबाव और सरकार के भीतर मंथन भी शामिल था। अब सामने आई जानकारी के अनुसार, अंतिम इस्तीफे से पहले धर्मेंद्र प्रधान दो बार पद छोड़ने की पेशकश कर चुके थे, लेकिन उस समय नेतृत्व ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। अंततः परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया।
दो बार इस्तीफा देने की इच्छा जताई, लेकिन नहीं मिली मंजूरी
रिपोर्ट के मुताबिक, NEET-UG परीक्षा विवाद और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने दो अलग-अलग मौकों पर इस्तीफा देने की पेशकश की थी। हालांकि उस समय पार्टी नेतृत्व का मानना था कि मामले की जांच और सुधारात्मक कदमों के बीच उनका पद छोड़ना उचित संदेश नहीं देगा। इसलिए दोनों बार उनसे अपने पद पर बने रहने को कहा गया।
बढ़ते विरोध और बदले हालात के बाद बदला फैसला
दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में छात्रों के प्रदर्शन लगातार तेज होते गए। आंदोलन के कारण राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव भी बढ़ा। इसी बीच केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेताओं और प्रदर्शनकारी प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। हालात का आकलन करने के बाद आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करने का निर्णय लिया गया।
अपने संदेश में छात्रों और देशहित का किया जिक्र
इस्तीफे की घोषणा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह फैसला किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। उन्होंने लिखा कि देश के छात्रों का भविष्य सर्वोपरि है और वह नहीं चाहते कि युवाओं का भविष्य लंबे राजनीतिक या कानूनी विवादों में उलझे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि राष्ट्र सेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
सरकार ने परीक्षा सुधार के लिए उठाए कई कदम
सरकार पहले ही NEET-UG परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने, मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने और भविष्य में परीक्षा प्रणाली में सुधार की घोषणा कर चुकी है। अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने की तैयारी भी की जा रही है। इन कदमों का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाना बताया गया है।
