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DRDO तैयार, मिसाइल-ड्रोन युग में भारत का बड़ा दांव- 'अग्नि-6’ से भारत की स्ट्राइक पावर होगी जबरदस्त

भारत ‘अग्नि-6’ मिसाइल के विकास की तैयारी में है, जिसकी मारक क्षमता 10,000 किमी से अधिक हो सकती है। डीआरडीओ ने इसकी पुष्टि की है। साथ ही हाइपरसोनिक मिसाइल प्रोग्राम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो भारत की सैन्य ताकत को नई ऊंचाई दे सकता है।

 
अग्नि-6
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Agni-6 Missile: पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन युद्ध के अनुभवों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में मिसाइल और ड्रोन की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत भी अपनी सैन्य क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

‘अग्नि-6’ के विकास को लेकर डीआरडीओ तैयार

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख समीर वी कामत ने कहा है कि भारत अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-6’ के विकास के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम केंद्र सरकार की मंजूरी पर निर्भर है और स्वीकृति मिलते ही इसे आगे बढ़ाया जाएगा।

भारत पहले ही ‘अग्नि-5’ मिसाइल को तैनात कर चुका है, जिसकी मारक क्षमता 5000 किलोमीटर से अधिक है और इसका बहु-वारहेड (एमआईआरवी) परीक्षण भी सफल रहा है।

अग्नि-6: मारक क्षमता और तकनीक में बड़ा उछाल

प्रस्तावित ‘अग्नि-6’ मिसाइल की मारक क्षमता 10,000 किलोमीटर से अधिक बताई जा रही है। हल्के पेलोड के साथ यह दूरी 14 से 16 हजार किलोमीटर तक भी जा सकती है।

इस मिसाइल में कई परमाणु वारहेड लगाने की क्षमता होगी। एक मिसाइल में लगभग 11 वारहेड लगाए जा सकते हैं, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता करीब 250 किलोटन तक हो सकती है। इसकी रफ्तार लगभग 30,000 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की संभावना है।

हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल पर भी तेजी से काम

डीआरडीओ प्रमुख ने बताया कि भारत का लंबी दूरी का एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम भी उन्नत चरण में पहुंच चुका है। यह मिसाइल ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना (मैक 10) तक की रफ्तार हासिल कर सकती है और करीब 1500 किलोमीटर तक सटीक हमला करने में सक्षम होगी।

इस मिसाइल की खासियत यह है कि यह कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए दिशा बदल सकती है, जिससे दुश्मन के रडार से बचना आसान हो जाता है।

ग्लाइड और क्रूज मिसाइल में क्या अंतर

हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल में स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग होता है, जिससे उसे उड़ान के दौरान ऊर्जा मिलती रहती है। वहीं, हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल बूस्टर से प्रारंभिक गति प्राप्त करने के बाद बिना अतिरिक्त ऊर्जा के लक्ष्य की ओर ग्लाइड करती है। वर्तमान में ग्लाइड मिसाइल तकनीक विकास के मामले में आगे बताई जा रही है।

ड्रोन-मिसाइल बनाम लड़ाकू विमान की बहस

एकीकृत रक्षा स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि भविष्य के युद्ध में केवल ड्रोन और मिसाइलों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारंपरिक और आधुनिक हथियारों का संतुलित उपयोग ही प्रभावी रणनीति साबित होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि लंबी अवधि में लड़ाकू विमान कई बार अधिक किफायती साबित होते हैं, क्योंकि उनका बार-बार उपयोग संभव है और उनके हथियार अपेक्षाकृत सस्ते होते हैं।


विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश की रक्षा रणनीति में विभिन्न प्रकार के हथियारों का संतुलित मिश्रण होना जरूरी है। मिसाइल, ड्रोन और लड़ाकू विमान- तीनों का संयोजन ही आधुनिक युद्ध में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।