कौन हैं सीमा खन्ना? ECINet विवाद क्या है... ERO और वोटर डेटा के केंद्रीकरण पर क्यों मचा बवाल
ECINet विवाद में चुनाव आयोग के आईटी विभाग की महानिदेशक सीमा खन्ना की भूमिका पर सवाल उठे हैं। दो चुनाव आयुक्तों ने ERO की पहुंच, मतदाता सूची के डेटा के केंद्रीकरण और वैधानिक अधिकारों को लेकर चिंता जताई है। जानिए ECINet विवाद क्या है और पूरा मामला कैसे सामने आया।
Election Commission ECINet: चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम ECINet को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। विवाद के केंद्र में चुनाव आयोग की महानिदेशक (आईटी) सीमा खन्ना हैं, जिनकी भूमिका को लेकर दो चुनाव आयुक्तों ने सवाल उठाया है। मामला सिर्फ तकनीकी व्यवस्था का नहीं, बल्कि मतदाता सूची तैयार करने वाले अधिकारियों के अधिकार और चुनावी डेटा के नियंत्रण से जुड़ा है।
ERO के अधिकार सीमित करने पर उठे सवाल
इंडियन एक्सप्रेस की जांच के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बात पर सवाल उठाया कि क्या सीमा खन्ना के नेतृत्व वाला आईटी विभाग Electoral Registration Officers (ERO) की ECINet तक पहुंच को सीमित कर सकता है।
दोनों चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन के समक्ष भी इस मुद्दे को उठाया। उनकी चिंता मुख्य रूप से मतदाता सूची के डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकरण और जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों के वैधानिक अधिकारों को लेकर है।
कौन हैं सीमा खन्ना?
सीमा खन्ना चुनाव आयोग के आईटी विभाग की महानिदेशक हैं और आयोग की डिजिटल तथा तकनीकी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालती हैं। वह 2025 में नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) से प्रतिनियुक्ति पर चुनाव आयोग में आई थीं। ECINet और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी सिस्टम में उनकी भूमिका इसी वजह से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विवाद की जड़ क्या है?
विवाद का मुख्य सवाल यह है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और रिकॉर्ड में बदलाव जैसे वैधानिक काम जिन अधिकारियों को सौंपे गए हैं, क्या उनके अधिकार किसी केंद्रीय आईटी सिस्टम के जरिए सीमित किए जा सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ अधिकारियों को ECINet में अपनी जिम्मेदारियों के मुताबिक पूरी पहुंच नहीं मिलने की शिकायतें सामने आईं। इसी को लेकर चुनाव आयुक्तों ने चिंता जताई कि तकनीकी व्यवस्था कहीं उन अधिकारियों के वैधानिक अधिकारों पर हावी न हो जाए।
ERO की भूमिका क्यों अहम है?
Electoral Registration Officer यानी ERO मतदाता सूची तैयार करने और उसमें जरूरी संशोधन से जुड़ी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण अधिकारी होता है। चुनाव आयोग के अनुसार, उसके इलेक्ट्रॉनिक रोल मैनेजमेंट सिस्टम का उद्देश्य मतदाता सूची में नाम जोड़ने, स्थानांतरित मतदाताओं और डुप्लीकेट प्रविष्टियों जैसे मामलों के प्रबंधन में मदद करना है।
यही वजह है कि तकनीकी सिस्टम में ERO की पहुंच और उसके वैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन इस विवाद का अहम हिस्सा बन गया है।
गोवा में 97 मतदाताओं का मामला भी चर्चा में
विवाद के बीच गोवा में 97 पात्र मतदाताओं के नाम से जुड़ा मामला भी सामने आया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जमीनी स्तर के ERO द्वारा पात्र मतदाताओं को दोबारा सूची में शामिल करने की कोशिश के बावजूद ECINet की केंद्रीकृत व्यवस्था से जुड़ी दिक्कतें सामने आईं।
इस मामले को उन आशंकाओं के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है, जिन्हें चुनाव आयुक्तों ने ECINet के केंद्रीकरण को लेकर उठाया था।
चुनावी डेटा के केंद्रीकरण पर क्यों बढ़ी चिंता?
मतदाता सूची चुनाव प्रक्रिया का बुनियादी हिस्सा है। ऐसे में उसमें नाम जोड़ने, हटाने या सुधारने की प्रक्रिया में तकनीकी सिस्टम की भूमिका बढ़ने के साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि अंतिम निर्णय लेने की वैधानिक शक्ति किसके पास है और उसे तकनीकी रूप से कैसे लागू किया जा रहा है।
फिलहाल विवाद का केंद्र ECINet की तकनीकी व्यवस्था, ERO के वैधानिक अधिकार और मतदाता डेटा के केंद्रीकरण को लेकर उठी आपत्तियां हैं। मामले में सामने आई रिपोर्टों के आधार पर इसे चुनाव आयोग के भीतर तकनीकी नियंत्रण बनाम वैधानिक अधिकार की बहस के रूप में देखा जा रहा है।
