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हज से लौटे बुजुर्ग दंपति को फ्लाइट में नहीं मिली एंट्री, आयोग ने स्पाइसजेट पर ठोका 62 हजार रुपये का जुर्माना

 
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हज यात्रा से लौट रहे एक बुजुर्ग दंपति के साथ कथित लापरवाही स्पाइसजेट एयरलाइंस को भारी पड़ गई। श्रीनगर उपभोक्ता आयोग ने एयरलाइन की सेवा में गंभीर कमी मानते हुए टिकट की राशि लौटाने के साथ कुल 62 हजार रुपये से अधिक का भुगतान करने का आदेश दिया है।

यह मामला जुलाई 2024 का है, जब कश्मीर निवासी गुलाम नबी फफू और उनकी पत्नी रजा बेगम हज यात्रा पूरी कर दिल्ली से श्रीनगर लौट रहे थे। उनके बेटे ने स्पाइसजेट की फ्लाइट की टिकट बुक कराई थी। फ्लाइट शाम 6:45 बजे दिल्ली से रवाना होकर रात 8:20 बजे श्रीनगर पहुंचने वाली थी।

बोर्डिंग पास होने के बावजूद नहीं मिली उड़ान

दंपति का कहना है कि वे समय से पहले एयरपोर्ट पहुंच गए थे। उन्होंने चेक-इन कराया, सामान जमा किया और उन्हें वैध बोर्डिंग पास भी जारी कर दिया गया। लेकिन जब विमान में सवार होने का समय आया तो एयरलाइन कर्मचारियों ने उन्हें बिना कोई स्पष्ट कारण बताए फ्लाइट में चढ़ने से रोक दिया।

दंपति का आरोप है कि उनकी सीटों पर अन्य यात्रियों को बैठा दिया गया और उनके बोर्डिंग पास भी रद्द कर दिए गए। इतना ही नहीं, उनका चेक-इन किया गया सामान भी कई घंटे बाद वापस मिला। तब तक श्रीनगर जाने वाली उस दिन की सभी अन्य उड़ानें भी निकल चुकी थीं।

मजबूरी में अगले दिन महंगी टिकट खरीदनी पड़ी

फ्लाइट छूटने के बाद दंपति को पूरी रात दिल्ली में रुकना पड़ा। अगले दिन उन्हें इंडिगो की फ्लाइट से श्रीनगर जाना पड़ा, जिसके लिए 13,450 रुपये की नई टिकट खरीदनी पड़ी। इस घटना से उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव और काफी असुविधा का सामना करना पड़ा।

उपभोक्ता आयोग ने माना एयरलाइन की गंभीर लापरवाही

मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा, जहां सुनवाई के बाद आयोग ने माना कि स्पाइसजेट ने यात्रियों के साथ अनुचित व्यवहार किया और उसकी सेवा में गंभीर कमी रही। आयोग ने कहा कि एयरलाइन की लापरवाही के कारण दंपति को आर्थिक नुकसान, मानसिक पीड़ा और अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी।

9 जून 2026 को सुनाए गए फैसले में आयोग ने स्पाइसजेट को दंपति की मूल टिकट की 10,078 रुपये की राशि लौटाने का आदेश दिया। इसके अलावा 52,000 रुपये मुआवजा देने के भी निर्देश दिए गए। इस तरह एयरलाइन को कुल 62 हजार रुपये से अधिक का भुगतान करना होगा।

उपभोक्ता आयोग के इस फैसले को एयरलाइन यात्रियों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।