चीन पर निर्भरता खत्म : भारत में पहली बार 6000 टन REPM उत्पादन , 7280 करोड़ की योजना को मिली मंजूरी
New Delhi : भारत सरकार ने चीन की रेयर अर्थ एक्सपोर्ट पाबंदियों के बीच बड़ा कदम उठाते हुए 7,280 करोड़ रुपये की रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स (REPM) मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दे दी है। यह योजना भारत में पहली बार 6,000 MTPA की क्षमता के साथ रेयर अर्थ मैग्नेट्स के घरेलू उत्पादन की शुरुआत करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में इस योजना को स्वीकृति प्रदान की गई। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य 6,000 टन प्रति वर्ष की उत्पादन क्षमता तैयार करना है।
रेयर अर्थ मैग्नेट्स की जरूरत
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स दुनिया के सबसे शक्तिशाली मैग्नेट्स में शामिल हैं और ये इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा उपकरणों में अहम भूमिका निभाते हैं। यह योजना देश में रेयर अर्थ ऑक्साइड्स से लेकर तैयार मैग्नेट्स तक की पूरी उत्पादन श्रृंखला स्थापित करेगी।
भारत में इन मैग्नेट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है और 2030 तक यह दोगुनी होने की संभावना है। वर्तमान में अधिकांश जरूरतें आयात पर निर्भर हैं। इस योजना से भारत में पहली बार पूर्ण REPM उत्पादन चेन तैयार होगी, जिससे रोजगार सृजन होगा, विदेशी निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योग मजबूत होंगे। यह कदम Net Zero 2070 की दिशा में भी सहायक होगा।
Cabinet approved first-of-its-kind Rare Earth Permanent Magnets (REPM) Scheme, to achieve Aatmanirbharta in permanent magnet manufacturing.
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) November 26, 2025
➡️ ₹7,280 Cr incentive | 7-year duration
✅ End-to-end value chain: oxides → metals → alloys → finished REPMs
✅ Total capacity:… pic.twitter.com/oiQ9ltaKhi
कुल 7,280 करोड़ रुपये की योजना में शामिल हैं:
- 5 साल तक REPM बिक्री पर 6,450 करोड़ रुपये का बिक्री-आधारित प्रोत्साहन
- उत्पादन संयंत्र स्थापित करने के लिए 750 करोड़ रुपये की पूंजी सहायता
योजना के तहत कुल उत्पादन क्षमता 5 कंपनियों में बांटी जाएगी, प्रत्येक को अधिकतम 1,200 MTPA आवंटित किया जाएगा। पहले 2 साल में उत्पादन इकाइयां स्थापित की जाएंगी और इसके बाद 5 साल तक बिक्री पर प्रोत्साहन वितरित किया जाएगा।
तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
सरकार का कहना है कि यह परियोजना भारत को REPM उत्पादन में वैश्विक स्तर पर सक्षम बनाएगी और घरेलू उद्योगों के लिए आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित करेगी। यह कदम 2047 तक विकसित भारत और नेट जीरो 2070 लक्ष्य की दिशा में एक अहम मील का पत्थर है।
