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10,000 की एंट्री, वोट की सेटिंग? जनसुराज ने बिहार चुनाव को बताया फर्जी

 
10,000 की एंट्री, वोट की सेटिंग? जनसुराज ने बिहार चुनाव को बताया फर्जी
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Patna : चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। गुरुवार (5 फरवरी 2026) को दाखिल याचिका में मुख्य रूप से बिहार सरकार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पर सवाल उठाए गए हैं। जनसुराज का आरोप है कि आचार संहिता लागू होने के दौरान 25-35 लाख महिलाओं के खातों में 10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए और नए लाभार्थियों को भी योजना में जोड़ा गया, जो पूरी तरह गैरकानूनी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच शुक्रवार (6 फरवरी) को इस याचिका पर सुनवाई करेगी।

याचिका की मुख्य मांगें 

जनसुराज ने अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल रिट याचिका में बिहार चुनाव में 'अवैध प्रक्रियाओं' का आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार), 112 (वार्षिक वित्तीय विवरण), 202 (राज्य का वार्षिक वित्तीय विवरण) और 324 (चुनाव आयोग की शक्तियां) का उल्लंघन है। मुख्य मांगें:  

- आचार संहिता लागू होने के दौरान महिलाओं के खातों में पैसे ट्रांसफर करना और नए लाभार्थियों को जोड़ना गैरकानूनी ठहराया जाए।  

- चुनाव आयोग को अनुच्छेद 324 और रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल्स एक्ट की धारा 123 के तहत कार्रवाई का निर्देश दिया जाए।  

- सेल्फ हेल्प ग्रुप JEEVIKA की 1.8 लाख महिला लाभार्थियों को पोलिंग बूथों पर नियुक्त करना भी गैरकानूनी था, क्योंकि इससे मतदान प्रभावित हुआ।  

- चुनाव आयोग को मुफ्त और कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा के लिए सत्ताधारी दल को चुनाव से कम से कम छह महीने पहले की समयसीमा निर्धारित करने का आदेश दिया जाए।  

- सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने आदेश का हवाला देकर बिहार चुनाव को दोबारा कराने की मांग।  

योजना की पृष्ठभूमि

बिहार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना 26 सितंबर 2025 को शुरू की गई थी, जो महिलाओं को स्वरोजगार के लिए 10 हजार रुपये की सहायता प्रदान करती है। चुनाव से ठीक पहले इस योजना के तहत ट्रांसफर और नए लाभार्थी जोड़ने को जनसुराज ने 'वोट बैंक राजनीति' का हिस्सा बताया है। बिहार विधानसभा चुनाव के मतदान 6 और 11 नवंबर 2025 को हुए थे, जबकि नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए गए।

प्रशांत किशोर का पक्ष 

प्रशांत किशोर, जो पहले कई पार्टियों के चुनावी रणनीतिकार रह चुके हैं, ने याचिका में कहा कि यह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) चुनाव को प्रभावित करने का सीधा माध्यम था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि चुनाव आयोग को मुफ्त योजनाओं और DBT स्कीम्स के लिए सख्त दिशानिर्देश तैयार करने का आदेश दिया जाए, ताकि भविष्य में चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। जनसुराज का दावा है कि यह कदम महिलाओं को लुभाने का 'अवैध तरीका' था, जो संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं  

इस याचिका पर बिहार सरकार या चुनाव आयोग की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कोर्ट इस पर सख्ती दिखाता है, तो यह भविष्य के चुनावों में मुफ्त योजनाओं की घोषणा पर बड़ा असर डाल सकता है। जनसुराज, जो प्रशांत किशोर की नई पार्टी है, ने इस याचिका के जरिए चुनावी अनियमितताओं पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश की है।