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रेल मंत्री से हाई कमिश्नर तक: दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश भेजने के पीछे क्या है गेम प्लान?

 
रेल मंत्री से हाई कमिश्नर तक: दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश भेजने के पीछे क्या है गेम प्लान?
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New Delhi : भारत सरकार ने वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का नया उच्चायुक्त नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में की गई है, जब भारत और बांग्लादेश के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत जारी है और दोनों देश आपसी संबंधों को संतुलित व मजबूत बनाए रखने की दिशा में प्रयासरत हैं।

राजनीतिक दृष्टि से अहम फैसला

दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल की राजनीति के संदर्भ में इसे भाजपा की रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है, जो आगामी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

दिनेश त्रिवेदी का राजनीतिक करियर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। वे पहले तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल थे और इसी पार्टी के कोटे से संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार में रेल मंत्री बने थे। वर्ष 2021 में उन्होंने टीएमसी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया।

कूटनीतिक फेरबदल का हिस्सा

त्रिवेदी अब प्रणय वर्मा की जगह बांग्लादेश में उच्चायुक्त का पद संभालेंगे। वहीं प्रणय वर्मा को ब्रसेल्स भेजा जा रहा है, जहां वे यूरोपीय संघ में भारत के राजदूत के रूप में कार्य करेंगे। इसे भारत की व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

हाल के वर्षों में बांग्लादेश की राजनीति में हुए बदलावों का असर भारत के साथ संबंधों पर भी पड़ा है। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में नई सरकार बनी। इस दौरान हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाओं से तनाव बढ़ा। हालांकि हालिया चुनावों में तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद संबंधों में सुधार के संकेत मिले हैं।

यूपीए कार्यकाल और विवाद

यूपीए सरकार के दौरान दिनेश त्रिवेदी रेल मंत्री और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री रह चुके हैं। वर्ष 2012 में रेल किराया बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर विवाद हुआ, जिसका विरोध ममता बनर्जी ने किया था। इसके बाद उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा।

4 जून 1950 को जन्मे दिनेश त्रिवेदी पश्चिम बंगाल की बैरकपुर लोकसभा सीट से 2009 से 2019 तक सांसद रहे हैं। इसके अलावा वे राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं। उनका राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव अब बांग्लादेश में भारत के प्रतिनिधि के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद जगाता है।