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UPI से स्थानीय मुद्रा तक… BRICS में भारत का बड़ा दांव! डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और डिजिटल पेमेंट पर जोर
 

 
 UPI से स्थानीय मुद्रा तक… BRICS में भारत का बड़ा दांव! डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और डिजिटल पेमेंट पर जोर
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नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को ब्रिक्स देशों से अपनी भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने और डिजिटल व्यापार को अधिक सुलभ बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

‘ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए गोयल ने बताया कि भारत का UPI सालाना 250 अरब से अधिक लेनदेन का आंकड़ा पार कर चुका है। उन्होंने कहा कि यूपीआई को अब 11 देशों में भी स्वीकार किया जाता है।

मंत्री ने कहा कि ब्रिक्स के सदस्य और साझेदार देश अपनी भुगतान प्रणालियों को जोड़ने, एक-दूसरे की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने तथा डिजिटल व्यापार को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करें। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की भी अपील की।

आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने पर जोर

ब्रिक्स बिजनेस फोरम का आयोजन दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर किया गया। भारत शनिवार से इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच आयोजित इस बैठक में व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

गोयल ने कहा कि साझेदार देशों के बीच व्यापार को गहरा और मजबूत बनाया जाना चाहिए। उन्होंने आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की जरूरत बताई, ताकि किसी भी सदस्य देश की आर्थिक वृद्धि और लोगों के कल्याण में बाधा न आए।

उन्होंने कच्चे माल और महत्वपूर्ण खनिजों समेत एक-दूसरे के उत्पादों के लिए बाजार खोलने का आह्वान किया। गोयल ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखलाएं तभी मजबूत होंगी, जब उनका संचालन दोनों दिशाओं में हो।

बाजार तक पहुंच आसान बनाने की अपील

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गैर-शुल्क उपायों से निर्यात लागत बढ़ती है, जो कई बार शुल्क उपायों से होने वाली लागत से भी अधिक हो सकती है। उन्होंने ब्रिक्स देशों से नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने और माल की खेप को तेजी से मंजूरी देने में सहयोग करने का आग्रह किया।

उन्होंने खाद्य सुरक्षा के लिए कृषि-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप को प्रोत्साहित करने तथा किसानों के लिए साझा समाधान विकसित करने की अपील की। इसके अलावा, कृषि, दवा, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, वाहन, वाहन कलपुर्जे और सेवाओं जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाएं बताईं।

गोयल ने सेवा बाजारों को एक-दूसरे के लिए खोलने, पेशेवरों की सीमापार आवाजाही आसान बनाने और पेशेवर योग्यताओं को मान्यता देने की प्रक्रिया सरल करने पर भी जोर दिया।

रूस ने रखा ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज का प्रस्ताव

सत्र को संबोधित करते हुए रूस के आर्थिक विकास मंत्री मैक्सिम रेशेतनिकोव ने कहा कि ब्रिक्स देश वैश्विक अर्थव्यवस्था के एक चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं और सतत भविष्य के लिए एक मजबूत आवाज हैं।

उन्होंने मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा देने तथा हरित और डिजिटल बदलाव को तेज करने के लिए ठोस कदम उठाने की वकालत की। रेशेतनिकोव ने बताया कि तीन साल पहले रूसी निर्यात के भुगतान में डॉलर और यूरो की संयुक्त हिस्सेदारी 85 प्रतिशत थी, जो अब घटकर करीब 11 प्रतिशत रह गई है।

रूसी मंत्री ने ‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज’ और ‘ब्रिक्स विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) संघ’ जैसी पहलों पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि ग्रेन एक्सचेंज एक एकीकृत व्यापार मंच होगा, जहां उत्पादक, कारोबारी और खरीदार सीधे लेनदेन कर सकेंगे।

उन्होंने ब्रिक्स देशों में विशेष आर्थिक क्षेत्रों की रैंकिंग और ‘ब्रिक्स बिजनेस नेविगेटर’ विकसित करने में सहयोग का भी आह्वान किया।

व्यापार वित्त की कमी दूर करने पर जोर

भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने वैश्विक व्यापार वित्त की कमी दूर करने के लिए साझा तंत्र विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार वित्त में करीब 2.5 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की कमी का अनुमान है।

अग्रवाल ने कहा कि निर्यातकों को पुष्ट आदेशों और भरोसेमंद भुगतान रिकॉर्ड के आधार पर किफायती कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में साझा ब्रिक्स तंत्र की संभावनाएं तलाशने के लिए जयपुर सहमति महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।

उन्होंने ब्रिक्स कनेक्ट, बेहतर बी2बी साझेदारियों, सालाना ब्रिक्स व्यापार एवं निवेश एक्सपो, डिजिटल व्यापार दस्तावेज और स्वास्थ्य देखभाल समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया।

11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है BRICS

ब्रिक्स में मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब को इसमें शामिल किया गया, जबकि इंडोनेशिया 2025 में सदस्य बना।

बेलारूस, बोलीविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम पिछले साल ब्रिक्स के साझेदार देश बने।

ब्रिक्स में दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। यह समूह वैश्विक आबादी के करीब 49.5 प्रतिशत, वैश्विक जीडीपी के करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के करीब 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है।