G7 Summit 2026: फ्रांस में फिर आमने-सामने हो सकते हैं PM मोदी और ट्रंप, क्या खत्म होगी टैरिफ टेंशन?
फ्रांस में होने वाले G7 Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। भारत-अमेरिका व्यापार तनाव, टैरिफ विवाद और भारत-पाकिस्तान मुद्दे के बाद दोनों नेताओं की संभावित बातचीत को बेहद अहम माना जा रहा है।
G7 Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकातें हमेशा वैश्विक राजनीति में सुर्खियां बटोरती रही हैं। अब एक बार फिर दोनों नेताओं के आमने-सामने आने की संभावना ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल बढ़ा दी है। अगले महीने फ्रांस में होने वाले G7 Summit में मोदी और ट्रंप की संभावित मुलाकात को लेकर दुनियाभर की निगाहें टिकी हुई हैं।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी को 15 से 17 जून तक होने वाले G7 Summit में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। हालांकि भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कई वर्षों से भारत इस मंच पर विशेष आमंत्रित देश के रूप में हिस्सा लेता रहा है।
फरवरी 2025 के बाद पहली बार आमने-सामने आ सकते हैं दोनों नेता
प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में हुई थी। ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद मोदी शुरुआती विदेशी नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने वॉशिंगटन का दौरा किया था।
उस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका व्यापार को 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया था। ट्रंप ने मोदी को “ग्रेट फ्रेंड” बताते हुए दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बताया था। लेकिन इसके बाद भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव भी देखने को मिला।
भारत-पाकिस्तान मुद्दे पर बढ़ा था विवाद
मई में भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर दावा किया था कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संघर्ष को रोकने में भूमिका निभाई। अमेरिका के राष्ट्रपति ने कई मंचों से कहा कि उनके दबाव और व्यापारिक चेतावनी की वजह से दोनों परमाणु संपन्न देश पीछे हटे।
हालांकि भारत ने इस दावे को सीधे तौर पर खारिज कर दिया था। भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया था कि संघर्ष विराम पूरी तरह भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी बातचीत का परिणाम था। यही मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की एक बड़ी वजह बना।
टैरिफ विवाद ने बढ़ाई दूरी
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में भी पिछले महीनों में खटास देखने को मिली। अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने के साथ रूस से तेल खरीदने को लेकर अतिरिक्त दबाव बनाया। ट्रंप प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत पर आरोप लगाया कि रूसी तेल खरीदकर वह अप्रत्यक्ष रूप से रूस की मदद कर रहा है।
हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने इस पूरे मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से बेहद संयमित रुख अपनाया और अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत ने अपने हितों से समझौता नहीं किया।
फिर से सुधरने लगे रिश्ते
सितंबर के बाद दोनों देशों के रिश्तों में नरमी देखने को मिली। ट्रंप ने मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और व्यापार वार्ता फिर से आगे बढ़ी। इसके बाद फरवरी 2026 में दोनों देशों के बीच व्यापार ढांचे पर सहमति बनी और कुछ टैरिफ कम किए गए। ट्रंप ने एक बार फिर मोदी को “मेरा भारतीय दोस्त” कहकर संबोधित किया। हालांकि ईरान युद्ध और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद प्रस्तावित व्यापार समझौता आगे नहीं बढ़ पाया।
G7 Summit में क्या होगा बड़ा संदेश?
अब फ्रांस में होने वाला G7 Summit भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि अभी तक दोनों नेताओं की औपचारिक द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि ट्रंप की शैली को देखते हुए “पुल-असाइड मीटिंग” संभव है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मोदी और ट्रंप के बीच सकारात्मक बातचीत होती है, तो इससे व्यापार, टैरिफ और रणनीतिक साझेदारी को लेकर नई दिशा मिल सकती है।
वैश्विक राजनीति में फिर दिख सकती है ‘मोदी-ट्रंप कैमिस्ट्री’
मोदी और ट्रंप की मुलाकातें हमेशा वैश्विक मीडिया की सुर्खियां रही हैं। “Howdy Modi” से लेकर “Namaste Trump” तक दोनों नेताओं की सार्वजनिक कैमिस्ट्री चर्चा में रही है। अब फ्रांस में संभावित मुलाकात केवल राजनीतिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति और आर्थिक रिश्तों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
