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लोकसभा में गौरव गोगोई का सरकार पर हमला, बोले- NTA में 34 पद, फिर 47 अफसरों पर कार्रवाई कैसे?
 

 
 लोकसभा में गौरव गोगोई का सरकार पर हमला, बोले- NTA में 34 पद, फिर 47 अफसरों पर कार्रवाई कैसे?
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नई दिल्ली। लोकसभा में कई दिनों के हंगामे के बाद मंगलवार को पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा हुई। इस दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर गंभीर नहीं है और यह विधेयक केवल दिखावे के लिए लाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून सरकार की विफलता का प्रतीक बन चुका है।

'2024 में कानून था, फिर 2026 में पेपर लीक कैसे हुआ?'

गोगोई ने कहा कि वर्ष 2024 में कानून बनने के बावजूद 2026 में फिर से NEET पेपर लीक हो गया, जिससे स्पष्ट है कि सरकार की मंशा और व्यवस्था दोनों विफल रही हैं। उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि पेपर लीक के समय उन्होंने पहले इनकार किया और अब इस्तीफे के बाद उनका सम्मान किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाओं से परेशान होकर कई छात्रों ने आत्महत्या जैसा कदम उठाया, लेकिन सरकार ने उनकी पीड़ा को गंभीरता से नहीं लिया।

NTA में 34 पद, फिर 47 अधिकारियों पर कार्रवाई कैसे?

गौरव गोगोई ने सरकार से सवाल किया कि जब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में केवल 34 स्वीकृत पद हैं और उनमें भी कई पद खाली हैं, तो सरकार 47 अधिकारियों पर कार्रवाई का दावा कैसे कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि आखिर वे 47 अधिकारी कौन हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि NTA के महानिदेशक को बदल दिया गया, लेकिन चेयरमैन को पद पर बनाए रखा गया। उन्होंने चेयरमैन के पिछले कार्यकाल का हवाला देते हुए उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाए।

'44 आरोपियों को मिल चुकी है जमानत'

गोगोई ने दावा किया कि 2024 के NEET पेपर लीक मामले में आरोपपत्र दाखिल किए गए 46 आरोपियों में से 44 को जमानत मिल चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित मास्टरमाइंड संजीव मुखिया लंबे समय तक फरार रहा और गिरफ्तारी के बाद उसे भी जमानत मिल गई। उनके अनुसार इससे साफ है कि सरकार दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही।

सरकार शिक्षा में सुधार नहीं चाहती : गोगोई

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री युवाओं की समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय सोशल मीडिया की बातें करते हैं, जबकि पहले गठित समितियों की सिफारिशों पर अमल नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि यदि पहले बनी समितियों ने प्रभावी सुझाव दिए थे, तो फिर दो साल बाद भी पेपर लीक जैसी घटनाएं क्यों हुईं।

छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का भी किया जिक्र

गौरव गोगोई ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर बल प्रयोग किया गया और लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश हुई। उन्होंने कहा कि कुछ घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और गृह मंत्री को इस पर जवाब देना चाहिए।

अपने भाषण के अंत में उन्होंने शायर वसीम बरेलवी की पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा—

"उसूलों पर आंच आए तो टकराना जरूरी है,
जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है।"

असम बाढ़ के लिए विशेष पैकेज की मांग

पेपर लीक के मुद्दे के अलावा गौरव गोगोई ने असम में आई बाढ़ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बाढ़ में कई लोगों की जान गई है और राज्य के लिए केंद्र सरकार को विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।