ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी बना इबोला का नया स्ट्रेन, भारत कितना सुरक्षित?
दुनिया एक बार फिर इबोला वायरस को लेकर सतर्क हो गई है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला संक्रमण के नए मामलों की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। शुरुआती जेनेटिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह वायरस कई हफ्तों या संभवतः कई महीनों से चुपचाप फैल रहा था। ऐसे में इसकी संक्रमण क्षमता और व्यवहार को लेकर वैज्ञानिकों के बीच चिंता बढ़ गई है।
कैसे फैलता है इबोला वायरस?
विशेषज्ञों के अनुसार इबोला उन वायरसों में शामिल नहीं है जो हवा के माध्यम से तेजी से फैलते हैं। यह संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, पसीने, मल, मूत्र या अन्य शारीरिक द्रवों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। मरीज की देखभाल करने वाले स्वास्थ्यकर्मी और परिवार के सदस्य सबसे अधिक जोखिम में माने जाते हैं।
लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. डेविड हेमन का कहना है कि इबोला का संक्रमण मुख्य रूप से शारीरिक द्रवों के संपर्क से फैलता है, इसलिए सावधानी और सुरक्षा उपाय बेहद जरूरी हैं।
शरीर पर कैसे करता है हमला?
शरीर में प्रवेश करने के बाद इबोला वायरस सीधे प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को निशाना बनाता है। यह पहले लसीका ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स) में अपनी संख्या बढ़ाता है और फिर रक्त के जरिए शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंच जाता है। इससे शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है और वायरस तेजी से फैलने लगता है।
पहचानना क्यों होता है मुश्किल?
इबोला के शुरुआती लक्षण सामान्य बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, सर्दी-जुकाम या मलेरिया जैसे दिखाई देते हैं। यही वजह है कि शुरुआती चरण में इसकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है। कई मामलों में मरीज को कुछ समय के लिए राहत भी महसूस होती है, लेकिन बाद में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
गंभीर स्थिति में शरीर के विभिन्न हिस्सों से रक्तस्राव होने लगता है। इस चरण में मरीज सबसे अधिक संक्रामक होता है और संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
भारत में कितना खतरा?
फिलहाल भारत में इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय आबादी के लिए तत्काल खतरा कम है। देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर निगरानी व्यवस्था, यात्रियों की स्वास्थ्य जांच और बड़े अस्पतालों में उपलब्ध त्वरित जांच सुविधाएं संभावित मामलों की पहचान करने में सक्षम हैं।
हालांकि अफ्रीकी देशों के साथ यात्रा और व्यापारिक संपर्कों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता और सावधानी बनाए रखना बेहद जरूरी है।
