NEET विवाद से लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक... भारत के छात्र आंदोलन को ग्लोबल मीडिया ने कैसे देखा?
Global Media on India Protest: NEET-UG परीक्षा विवाद से शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का भी ध्यान अपनी ओर खींचा है। दुनिया के कई प्रमुख समाचार संस्थानों ने इसे केवल परीक्षा विवाद नहीं, बल्कि भारत में युवाओं की आकांक्षाओं, जवाबदेही और शासन व्यवस्था से जुड़ी बड़ी राजनीतिक घटना के रूप में पेश किया है।
Reuters ने इसे मोदी सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बताया
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के दौरान सामने आई सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौतियों में से एक माना जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री मोदी को आमतौर पर सार्वजनिक दबाव के आगे न झुकने वाले नेता के रूप में देखा जाता है, ऐसे में इस फैसले को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
CNN ने कहा- यह सिर्फ परीक्षा नहीं, युवाओं की बेचैनी का संकेत
CNN ने आंदोलन को परीक्षा अनियमितताओं से आगे बढ़कर युवाओं की बेरोजगारी, अवसरों की कमी और शासन व्यवस्था को लेकर बढ़ती असंतुष्टि से जोड़कर देखा। रिपोर्ट के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन भारत की युवा पीढ़ी की व्यापक चिंताओं को सामने लाता है और इसे सरकार के लिए एक दुर्लभ चुनौती के रूप में पेश किया गया।
Financial Times ने बताया छात्र आंदोलन की बड़ी जीत
Financial Times ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि लंबे समय तक चले छात्र आंदोलन के बाद सरकार को कई महत्वपूर्ण कदम उठाने पड़े। अखबार ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, परीक्षा सुधारों की घोषणा और आंदोलनकारियों के साथ संवाद को आंदोलन की बड़ी उपलब्धि बताया। रिपोर्ट में इसे भारत में छात्र शक्ति की महत्वपूर्ण जीत के रूप में भी देखा गया।
Wall Street Journal ने Gen Z की ताकत पर किया फोकस
Wall Street Journal ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत की Gen Z ने इस आंदोलन के जरिए अपनी राजनीतिक और सामाजिक ताकत का प्रदर्शन किया। अखबार के अनुसार, परीक्षा विवाद से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे युवाओं के भविष्य, रोजगार और जवाबदेही जैसे व्यापक मुद्दों का प्रतीक बन गया।
विदेशी मीडिया में पुलिस कार्रवाई भी रही चर्चा का विषय
अंतरराष्ट्रीय मीडिया की कई रिपोर्टों में दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज, आंसू गैस और बड़ी संख्या में जुटे छात्रों की तस्वीरों का भी उल्लेख किया गया। इन रिपोर्टों में कहा गया कि इन घटनाओं ने आंदोलन को वैश्विक स्तर पर और अधिक चर्चा का विषय बना दिया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बताया अहम राजनीतिक घटनाक्रम
विदेशी मीडिया संस्थानों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ बताया। कई रिपोर्टों में इसे मोदी सरकार के लिए एक असाधारण राजनीतिक फैसला बताया गया, क्योंकि आमतौर पर सरकार सार्वजनिक आंदोलनों के दबाव में ऐसे कदम कम ही उठाती है।
भारत के छात्र आंदोलन पर दुनिया की नजर
विश्लेषकों का मानना है कि NEET-UG विवाद से शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल परीक्षा सुधार तक सीमित नहीं रहा। अंतरराष्ट्रीय मीडिया की कवरेज में इसे भारत की युवा पीढ़ी की अपेक्षाओं, सरकारी जवाबदेही और लोकतांत्रिक संवाद से जुड़े व्यापक मुद्दों के संदर्भ में देखा गया है। आने वाले समय में परीक्षा सुधारों और सरकार द्वारा किए जाने वाले वादों के क्रियान्वयन पर भी वैश्विक नजर बनी रहने की संभावना जताई जा रही है।
