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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 46 हजार टन LPG भारत ला रहा ग्रीन सान्वी, जानें रास्ते में कितना फ्यूल होता है खर्च?

 
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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बने जोखिमों के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़ रहा है।

लेकिन सवाल यह है कि जो जहाज हजारों टन गैस लेकर आता है, वह खुद इस सफर में कितना ईंधन खर्च करता है?

पूरी यात्रा में कितना ईंधन खर्च?

विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से भारत के पश्चिमी तट—जैसे मुंबई या कांडला—तक पहुंचने में इस जहाज को करीब 80 से 150 मीट्रिक टन बंकर ईंधन खर्च करना पड़ता है।

यह आंकड़ा जहाज की रफ्तार, समुद्री मौसम और धाराओं पर निर्भर करता है, लेकिन इससे पूरी यात्रा की ऊर्जा लागत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

रोजाना कितना ईंधन जलाता है जहाज?

‘ग्रीन सान्वी’ जैसे बड़े एलपीजी टैंकर को Very Large Gas Carrier (VLGC) श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे जहाज आमतौर पर रोजाना 40 से 70 मीट्रिक टन ईंधन खर्च करते हैं।

चूंकि यह सफर करीब 2 से 3 दिन का होता है, इसलिए कुल खपत 80 से 150 टन के बीच रहती है।

दूरी और समय का गणित

होर्मुज स्ट्रेट से भारत के पश्चिमी तट तक की दूरी करीब 1000 से 1550 किलोमीटर है।

कांडला बंदरगाह तक पहुंचने में लगभग 37 घंटे
मुंबई तक पहुंचने में करीब 53 घंटे

लगते हैं, बशर्ते जहाज की गति 24 से 31 किमी/घंटा के बीच रहे।

कितनी LPG लेकर आ रहा है जहाज?

‘ग्रीन सान्वी’ इस समय करीब 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है, जबकि इसकी कुल क्षमता 58,000 मीट्रिक टन से अधिक है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जहाज 6 अप्रैल 2026 तक मुंबई पहुंच सकता है।

ईंधन खपत क्यों है अहम?

ऐसे टैंकरों की ईंधन खपत सिर्फ संचालन लागत ही नहीं बढ़ाती, बल्कि इसका असर वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ता है। मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के दौर में समय पर और किफायती डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए ईंधन प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम कदम

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ‘ग्रीन सान्वी’ का भारत पहुंचना देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 46 हजार टन LPG भारत ला रहा  ग्रीन सान्वी,  जानें रास्ते में कितना फ्यूल होता है खर्च? नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बने जोखिमों के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़ रहा है।

लेकिन सवाल यह है कि जो जहाज हजारों टन गैस लेकर आता है, वह खुद इस सफर में कितना ईंधन खर्च करता है?

पूरी यात्रा में कितना ईंधन खर्च?

विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से भारत के पश्चिमी तट—जैसे मुंबई या कांडला—तक पहुंचने में इस जहाज को करीब 80 से 150 मीट्रिक टन बंकर ईंधन खर्च करना पड़ता है।

यह आंकड़ा जहाज की रफ्तार, समुद्री मौसम और धाराओं पर निर्भर करता है, लेकिन इससे पूरी यात्रा की ऊर्जा लागत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

रोजाना कितना ईंधन जलाता है जहाज?

‘ग्रीन सान्वी’ जैसे बड़े एलपीजी टैंकर को Very Large Gas Carrier (VLGC) श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे जहाज आमतौर पर रोजाना 40 से 70 मीट्रिक टन ईंधन खर्च करते हैं।

चूंकि यह सफर करीब 2 से 3 दिन का होता है, इसलिए कुल खपत 80 से 150 टन के बीच रहती है।

दूरी और समय का गणित

होर्मुज स्ट्रेट से भारत के पश्चिमी तट तक की दूरी करीब 1000 से 1550 किलोमीटर है।

कांडला बंदरगाह तक पहुंचने में लगभग 37 घंटे
मुंबई तक पहुंचने में करीब 53 घंटे

लगते हैं, बशर्ते जहाज की गति 24 से 31 किमी/घंटा के बीच रहे।

कितनी LPG लेकर आ रहा है जहाज?

‘ग्रीन सान्वी’ इस समय करीब 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है, जबकि इसकी कुल क्षमता 58,000 मीट्रिक टन से अधिक है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जहाज 6 अप्रैल 2026 तक मुंबई पहुंच सकता है।

ईंधन खपत क्यों है अहम?

ऐसे टैंकरों की ईंधन खपत सिर्फ संचालन लागत ही नहीं बढ़ाती, बल्कि इसका असर वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ता है।

मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के दौर में समय पर और किफायती डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए ईंधन प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम कदम

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ‘ग्रीन सान्वी’ का भारत पहुंचना देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।