टैक्स चोरी में गिरफ्तारी का अधिकार हो सकता है खत्म, कोर्ट की मंजूरी जरूरी, 5 करोड़ तक बढ़ेगी सीमा
GST Council Meeting: जीएसटी व्यवस्था में टैक्स चोरी और आपराधिक कार्रवाई से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी है। सात अक्टूबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में अगर प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो गंभीर मामलों में गिरफ्तारी के मौजूदा अधिकारों में बदलाव हो सकता है। प्रस्ताव के तहत गिरफ्तारी के लिए अदालत की अनुमति जरूरी किए जाने पर विचार है।
इसके साथ ही अभियोजन की मौजूदा एक करोड़ रुपये की सीमा को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव भी रखा जा सकता है। इसका उद्देश्य आपराधिक कार्रवाई को बड़े और गंभीर टैक्स मामलों तक सीमित करना है।
गिरफ्तारी के लिए कोर्ट की मंजूरी का प्रस्ताव
अभी जीएसटी अधिकारियों को आयुक्त स्तर के अधिकारी की पूर्व मंजूरी के बाद कुछ गंभीर मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार है। इनमें एक करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने या गलत तरीके से रिफंड हासिल करने जैसे मामले शामिल हैं।
प्रस्तावित बदलाव के तहत इस व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता है। गिरफ्तारी की जरूरत पड़ने पर अदालत की अनुमति अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव है।
अभियोजन की सीमा एक करोड़ से बढ़कर पांच करोड़
जीएसटी से जुड़े आपराधिक मामलों में अभियोजन की सीमा भी बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। मौजूदा एक करोड़ रुपये की सीमा को बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये किया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, वस्तुओं या सेवाओं के वर्गीकरण, मूल्यांकन या इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े सामान्य विवादों को आपराधिक कार्रवाई के दायरे से बाहर रखने की दिशा में भी बदलाव प्रस्तावित हैं। यानी हर टैक्स विवाद को आपराधिक मामले में बदलने के बजाय गंभीर मामलों पर ही अभियोजन का फोकस रखने की तैयारी है।
24 अपराधों में सजा के प्रावधान नरम करने का प्रस्ताव
प्रस्तावित सुधारों में जीएसटी कानून के तहत अपराध और सजा से जुड़े प्रावधानों में भी बदलाव शामिल हैं। इसके तहत 24 अपराधों में सजा के प्रावधानों को नरम करने, नौ अपराधों को पूरी तरह हटाने और 11 अपराधों को मौजूदा स्वरूप में बनाए रखने पर विचार हो सकता है।
इसके अलावा न्यूनतम सजा का प्रावधान हटाने का प्रस्ताव भी है। इससे अदालत के लिए हर मामले में कारावास की सजा देना अनिवार्य नहीं रहेगा और जुर्माना लगाने का विकल्प उपलब्ध रहेगा। मध्यम श्रेणी के अपराधों में अधिकतम सजा को तीन साल से घटाकर दो साल करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन बताया जा रहा है।
छोटे करदाताओं को मिल सकती है राहत
जीएसटी सुधारों के पैकेज में छोटे करदाताओं के लिए भी राहत के प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं। रिटर्न दाखिल करने में देरी, वर्गीकरण से जुड़े विवाद या नकदी की कमी के कारण टैक्स भुगतान में देरी जैसे मामलों में टैक्स, ब्याज और आनुपातिक जुर्माना जमा कर गिरफ्तारी से बचाव का रास्ता देने पर विचार संभव है।
इसके अलावा छोटे करदाताओं के लिए विलंब शुल्क माफ करने और जुर्माने को अधिक तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है।
टैक्स वसूली और वित्तीय दंड का अधिकार रहेगा
प्रस्तावित बदलावों का मतलब यह नहीं होगा कि सरकार टैक्स वसूली या वित्तीय दंड लगाने का अधिकार खो देगी। टैक्स की वसूली और गलत तरीके से ITC का दावा करने जैसे मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। कंपाउंडिंग की व्यवस्था के तहत निर्धारित टैक्स, ब्याज और जुर्माना जमा करके अपराध का निपटारा करने का विकल्प भी बना रह सकता है।
कंपनियों को बीमा प्रीमियम पर ITC की उम्मीद
जीएसटी काउंसिल की बैठक में कंपनियों से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है। कंपनियां अपने कर्मचारियों को बीमा कवर देने के लिए जो प्रीमियम चुकाती हैं, उस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकें, इस प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल कंपनियों को समूह बीमा पॉलिसियों पर 18 प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करना पड़ता है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की स्थिति में कंपनियों के लिए इस खर्च पर ITC का रास्ता खुल सकता है।
अगली पीढ़ी के GST सुधारों का हिस्सा
इन बदलावों को सरकार के व्यापक जीएसटी सुधारों के अगले चरण का हिस्सा माना जा रहा है। सितंबर 2025 में जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने के बाद अब पंजीकरण प्रक्रिया आसान करने, रिफंड में तेजी लाने, ITC प्रक्रिया को सरल बनाने तथा कारण बताओ नोटिस और जुर्माने से जुड़े नियमों में बदलाव पर भी काम किया जा रहा है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अंतिम फैसला जीएसटी काउंसिल की बैठक में ही होगा।
