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पत्रकार हत्या मामले में गुरमीत राम रहीम को राहत, हाई कोर्ट ने आरोपों से बरी किया
 

 
 पत्रकार हत्या मामले में गुरमीत राम रहीम को राहत, हाई कोर्ट ने आरोपों से बरी किया
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चंडीगढ़: बहुचर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है। कोर्ट ने शनिवार को विशेष सीबीआई अदालत के 2019 के फैसले को पलटते हुए गुरमीत राम रहीम के खिलाफ लगे आरोपों को सबूतों के अभाव में साबित नहीं मानते हुए उन्हें निर्दोष घोषित किया।

हालांकि, कोर्ट ने अन्य तीन दोषियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने अपीलों पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष गुरमीत राम रहीम की कथित साजिश में भूमिका को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा, जिससे उन्हें शक का लाभ मिला।

यह मामला 24 वर्ष पुराना है, जब 24 अक्टूबर 2002 को सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। छत्रपति अपने अखबार 'पूरा सच' में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े गंभीर आरोप प्रकाशित करते थे, जिसमें साध्वियों के यौन शोषण जैसे मुद्दे शामिल थे। हत्या के बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

11 जनवरी 2019 को सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरमीत राम रहीम समेत चार लोगों को दोषी ठहराया था और 17 जनवरी 2019 को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दोषियों ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिस पर लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला आया है।

गुरमीत राम रहीम फिलहाल अन्य मामलों में सजा काट रहे हैं, जिसमें 2017 के साध्वी यौन शोषण मामले में 20 वर्ष की कैद शामिल है। वे रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं। रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बरी होने के बावजूद उनकी रिहाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि अन्य सजाएं जारी हैं।

छत्रपति के परिजनों ने इस फैसले पर निराशा जताई है और सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही है। यह फैसला डेरा प्रमुख के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है, लेकिन केस की जटिलता को देखते हुए आगे की कानूनी लड़ाई जारी रह सकती है।