मैं चांद पर जाना चाहूंगी, लेकिन मेरा पति मुझे मार डालेगा...आखिर सुनीता विलियम्स ने ऐसा क्यों कहा
Updated: Jan 21, 2026, 12:17 IST
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भारतीय मूल की प्रसिद्ध अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में 27 साल का ऐतिहासिक सफर तय करने के बाद अब आधिकारिक रूप से संन्यास ले लिया है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार, उनकी रिटायरमेंट 27 दिसंबर 2025 से प्रभावी हो गई, यानी क्रिसमस के ठीक बाद उन्होंने अपने शानदार करियर को अलविदा कह दिया।
हालांकि, रिटायरमेंट से पहले दिया गया उनका एक बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया। जब उनसे भविष्य के चंद्र मिशन को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने हंसते हुए कहा था, “मैं चांद पर जाना चाहूंगी, लेकिन मेरा पति मुझे मार डालेगा।” यह बयान डर नहीं, बल्कि परिवार की चिंता और मिशन की अनिश्चितताओं पर उनका मजाकिया अंदाज था।
8 दिन का मिशन, जो बन गया 9 महीने का अनुभव
दरअसल, जून 2024 में सुनीता विलियम्स बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से एक टेस्ट मिशन पर रवाना हुई थीं। यह मिशन महज 8 दिनों का होना था, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण स्टारलाइनर को बिना क्रू के वापस लौटना पड़ा और सुनीता को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर ही रुकना पड़ा।
यही छोटा सा मिशन बढ़ते-बढ़ते 9 महीने से ज्यादा का हो गया। इस दौरान सोशल मीडिया पर यह चर्चा भी शुरू हो गई कि क्या वह अंतरिक्ष में “फंस” गई हैं। इस पर सुनीता ने साफ कहा कि उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “मुझे पूरी प्रक्रिया पर भरोसा है. हम स्पेसक्राफ्ट कैसे बनाते हैं, लॉन्च करते हैं और फैसले लेते हैं।”
नासा ने भी इस मिशन को असफल मानने से इनकार किया। एजेंसी का कहना है कि स्टारलाइनर मिशन से भविष्य के कमर्शियल स्पेस प्रोग्राम्स को अहम सीख मिली है।
‘मेरा पति मुझे मार डालेगा’
जब सुनीता से पूछा गया कि अगर मौका मिले तो क्या वह चांद पर जाने वाले मिशन का हिस्सा बनेंगी, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए यह चर्चित जवाब दिया। यह बयान उनके आत्मविश्वास और संतुलित सोच को दर्शाता है। साफ है कि वह न तो घबराई हुई थीं और न ही खुद को असहाय मानती थीं।
रिकॉर्ड्स की लंबी फेहरिस्त
1998 में नासा के लिए चुनी गईं सुनीता विलियम्स ने तीन अंतरिक्ष मिशनों में कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जो किसी भी नासा अंतरिक्ष यात्री के लिए दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। उन्होंने 9 स्पेसवॉक किए, जिनकी कुल अवधि 62 घंटे 6 मिनट रही। यह किसी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इसके अलावा, वह अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली दुनिया की पहली इंसान भी बनीं।
नासा प्रशासन ने उनके रिटायरमेंट पर कहा कि सुनीता विलियम्स मानव अंतरिक्ष उड़ान की अग्रदूत रही हैं। उनके नेतृत्व ने न केवल लो-अर्थ ऑर्बिट में कमर्शियल मिशनों का रास्ता खोला, बल्कि आर्टेमिस मिशन के जरिए चांद और मंगल की ओर बढ़ने की नींव भी रखी।
क्यों लिया संन्यास?
मार्च 2025 में अपना अंतिम मिशन पूरा कर पृथ्वी लौटने के बाद सुनीता ने यह फैसला लिया कि अब नई पीढ़ी के अंतरिक्ष यात्रियों को आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए। उनका कहना है कि अंतरिक्ष उनका “सबसे पसंदीदा स्थान” रहा है, लेकिन अब उनकी भूमिका एक प्रेरणा के रूप में आगे की पीढ़ियों के साथ रहेगी।
हालांकि, रिटायरमेंट से पहले दिया गया उनका एक बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया। जब उनसे भविष्य के चंद्र मिशन को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने हंसते हुए कहा था, “मैं चांद पर जाना चाहूंगी, लेकिन मेरा पति मुझे मार डालेगा।” यह बयान डर नहीं, बल्कि परिवार की चिंता और मिशन की अनिश्चितताओं पर उनका मजाकिया अंदाज था।
8 दिन का मिशन, जो बन गया 9 महीने का अनुभव
दरअसल, जून 2024 में सुनीता विलियम्स बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से एक टेस्ट मिशन पर रवाना हुई थीं। यह मिशन महज 8 दिनों का होना था, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण स्टारलाइनर को बिना क्रू के वापस लौटना पड़ा और सुनीता को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर ही रुकना पड़ा।
यही छोटा सा मिशन बढ़ते-बढ़ते 9 महीने से ज्यादा का हो गया। इस दौरान सोशल मीडिया पर यह चर्चा भी शुरू हो गई कि क्या वह अंतरिक्ष में “फंस” गई हैं। इस पर सुनीता ने साफ कहा कि उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “मुझे पूरी प्रक्रिया पर भरोसा है. हम स्पेसक्राफ्ट कैसे बनाते हैं, लॉन्च करते हैं और फैसले लेते हैं।”
नासा ने भी इस मिशन को असफल मानने से इनकार किया। एजेंसी का कहना है कि स्टारलाइनर मिशन से भविष्य के कमर्शियल स्पेस प्रोग्राम्स को अहम सीख मिली है।
‘मेरा पति मुझे मार डालेगा’
जब सुनीता से पूछा गया कि अगर मौका मिले तो क्या वह चांद पर जाने वाले मिशन का हिस्सा बनेंगी, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए यह चर्चित जवाब दिया। यह बयान उनके आत्मविश्वास और संतुलित सोच को दर्शाता है। साफ है कि वह न तो घबराई हुई थीं और न ही खुद को असहाय मानती थीं।
रिकॉर्ड्स की लंबी फेहरिस्त
1998 में नासा के लिए चुनी गईं सुनीता विलियम्स ने तीन अंतरिक्ष मिशनों में कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए, जो किसी भी नासा अंतरिक्ष यात्री के लिए दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है। उन्होंने 9 स्पेसवॉक किए, जिनकी कुल अवधि 62 घंटे 6 मिनट रही। यह किसी महिला अंतरिक्ष यात्री द्वारा बनाया गया सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। इसके अलावा, वह अंतरिक्ष में मैराथन दौड़ने वाली दुनिया की पहली इंसान भी बनीं।
नासा प्रशासन ने उनके रिटायरमेंट पर कहा कि सुनीता विलियम्स मानव अंतरिक्ष उड़ान की अग्रदूत रही हैं। उनके नेतृत्व ने न केवल लो-अर्थ ऑर्बिट में कमर्शियल मिशनों का रास्ता खोला, बल्कि आर्टेमिस मिशन के जरिए चांद और मंगल की ओर बढ़ने की नींव भी रखी।
क्यों लिया संन्यास?
मार्च 2025 में अपना अंतिम मिशन पूरा कर पृथ्वी लौटने के बाद सुनीता ने यह फैसला लिया कि अब नई पीढ़ी के अंतरिक्ष यात्रियों को आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए। उनका कहना है कि अंतरिक्ष उनका “सबसे पसंदीदा स्थान” रहा है, लेकिन अब उनकी भूमिका एक प्रेरणा के रूप में आगे की पीढ़ियों के साथ रहेगी।
