Movie prime

तिलक रोका तो बवाल होगा- Lenskart स्टोर में BJP नेता ने घुसकर किया हंगामा, वीडियो वायरल

Lenskart की ग्रूमिंग पॉलिसी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मुंबई में स्टोर पर हंगामे तक पहुंच गया। तिलक-बिंदी पर कथित रोक के विरोध में प्रदर्शन ने कर्मचारियों को निशाना बनाया। यह मामला अब धार्मिक अभिव्यक्ति, सोशल मीडिया आक्रोश और कॉरपोरेट जवाबदेही पर बड़ी बहस बन गया है।

 
Lenskart Controversy
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

Lenskart Controversy: आईवियर ब्रांड Lenskart को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे में बदलता नजर आ रहा है। कंपनी की कथित ‘ग्रूमिंग पॉलिसी’ पर उठे सवालों ने सोशल मीडिया पर तेजी से तूल पकड़ा और देखते ही देखते ‘बॉयकॉट’ की मांग तक पहुंच गया। मुंबई में इस विवाद ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब एक राजनीतिक कार्यकर्ता ने स्टोर में पहुंचकर कर्मचारियों से सीधे टकराव शुरू कर दिया।

स्टोर के अंदर हंगामा: विरोध या दबाव?

घटना में Nazia Elahi Khan नाम की एक महिला नेता कैमरा टीम के साथ स्टोर में दाखिल हुईं और स्टाफ से तीखे सवाल किए। आरोप था कि कर्मचारियों को तिलक, बिंदी और कलावा पहनने से रोका जा रहा है।

इस दौरान स्टोर मैनेजर, जिसकी पहचान Mohsin Khan के रूप में हुई, को सीधे निशाना बनाया गया। वीडियो में देखा गया कि उनसे उनकी धार्मिक पहचान को लेकर सवाल पूछे गए और उन पर दबाव बनाया गया। स्थिति तब और विवादित हो गई जब स्टाफ के कुछ सदस्यों को जबरन तिलक लगाया गया।

सोशल मीडिया ने बढ़ाया विवाद का दायरा

यह पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं। कुछ यूजर्स ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का मामला बताया, तो कई लोगों ने इसे कर्मचारियों के साथ ‘अनुचित व्यवहार’ करार दिया।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर पहले से ही Lenskart के खिलाफ विरोध चल रहा था। कई वीडियो में स्टोर्स के बाहर विरोध प्रदर्शन और चश्मे फेंकने जैसी घटनाएं भी सामने आईं।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक कथित आंतरिक दस्तावेज वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि कर्मचारियों के लिए तिलक और बिंदी पहनने पर रोक है।

हालांकि कंपनी की ओर से बाद में सफाई दी गई कि यह एक पुराना दस्तावेज है और वर्तमान नीति में सभी धार्मिक प्रतीकों—जैसे तिलक, बिंदी, कलावा, कड़ा, हिजाब और पगड़ी—की अनुमति है। लेकिन तब तक मामला काफी बढ़ चुका था और लोगों ने अपनी-अपनी राय बनानी शुरू कर दी थी।

विरोध से टकराव तक: बदलती प्रवृत्ति पर सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना सिर्फ एक कॉरपोरेट विवाद नहीं, बल्कि समाज में बढ़ती असहिष्णुता और त्वरित प्रतिक्रिया की प्रवृत्ति को भी दर्शाती है।

जहां एक तरफ कंपनियों को अपनी नीतियों के लिए जवाबदेह होना चाहिए, वहीं दूसरी तरफ विरोध का तरीका भी सवालों के घेरे में है। स्टोर के कर्मचारियों को, जो नीति निर्धारण में शामिल नहीं थे, सीधे निशाना बनाना कई लोगों को गलत लगा।

बड़ी तस्वीर: आक्रोश की नई ‘रील पॉलिटिक्स’

भारत में पिछले कुछ वर्षों में इस तरह के विवाद तेजी से बढ़े हैं। चाहे Fabindia का ‘जश्न-ए-रिवाज’ विवाद हो या Tanishq का विज्ञापन मामला—हर बार सोशल मीडिया ने आक्रोश को कई गुना बढ़ा दिया।

मुंबई की यह घटना दिखाती है कि अब विरोध सिर्फ आवाज उठाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ‘पब्लिक परफॉर्मेंस’ का रूप ले चुका है।