Movie prime

अगर हम भार हैं तो कह दो: बृजभूषण सिंह का ऐलान—2027 या 2029 में जवाब देंगे
 

 
 अगर हम भार हैं तो कह दो: बृजभूषण सिंह का ऐलान—2027 या 2029 में जवाब देंगे
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

भागलपुर: कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बिहार के भागलपुर में आयोजित बाबू वीर कुंवर सिंह विजय उत्सव के दौरान क्षत्रिय समाज की अनदेखी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में क्षत्रियों का अस्तित्व कमजोर होता जा रहा है और अब समय आ गया है कि समाज अपनी ताकत पहचाने।

चुनौती भरे अंदाज में उन्होंने कहा, “अगर किसी को लगता है कि हम अनुपयोगी हो गए हैं, तो साफ-साफ कह दे। 2027 में कहें या 2029 में, जब भी कहें, हम अपनी उपयोगिता साबित कर देंगे।”

‘हमारी चुप्पी ही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी’

बृजभूषण सिंह ने कहा कि इतिहास में क्षत्रिय समाज के महापुरुषों को वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। उन्होंने वीर कुंवर सिंह, महाराजा देवी बक्श सिंह, रानी लक्ष्मीबाई और बिरसा मुंडा का जिक्र करते हुए कहा कि इन क्रांतिकारियों के योगदान को नजरअंदाज किया गया।

उन्होंने कहा, “यह हमारी गलती है कि जब-जब हमें दबाया गया, हम मौन रहे। यही वजह है कि हमें आज तवज्जो नहीं मिल रही।”

संविधान को लेकर भी उठाए सवाल

संविधान निर्माण के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर का नाम लेते हुए कहा कि संविधान का श्रेय केवल एक व्यक्ति तक सीमित कर दिया गया, जबकि संविधान सभा में कई सदस्यों का योगदान था। उन्होंने दावा किया कि उस समय बिहार के प्रतिनिधियों की संख्या सबसे अधिक थी, लेकिन उन्हें उचित मान्यता नहीं मिली।

‘सरकारों की नजरों में हमारा कोई अस्तित्व नहीं’

कार्यक्रम में क्षत्रिय समाज को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज सरकारों की नजर में उनका अस्तित्व कमजोर हो गया है। उन्होंने भगवान राम, बप्पा रावल और महाराणा प्रताप के उदाहरण देते हुए समाज से आत्ममंथन करने की अपील की।

2023 विवाद और राजनीतिक संदेश

अपने ऊपर लगे आरोपों का जिक्र करते हुए बृजभूषण सिंह ने कहा कि 2023 में उनके खिलाफ “विश्वव्यापी षड्यंत्र” हुआ, लेकिन वे झुके नहीं। उन्होंने कवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियां और हनुमान चालीसा की चौपाई पढ़ते हुए अपने संघर्ष का जिक्र किया।

2029 चुनाव लड़ने का ऐलान

बृजभूषण सिंह ने दोहराया कि वे 2029 का लोकसभा चुनाव जरूर लड़ेंगे, चाहे उन्हें पार्टी से टिकट मिले या नहीं। उन्होंने कहा, “हम चुनाव जरूर लड़ेंगे और एक बार फिर संसद पहुंचेंगे।”

सियासी संदेश और रणनीति

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, उनके हालिया बयानों को पार्टी और सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि वे अपने परिवार के सदस्यों को संगठन और सरकार में जगह दिलाने के लिए सक्रिय हैं, साथ ही क्षत्रिय राजनीति के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।