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पेरेंट्स के लिए जरूरी खबर: BCG से लेकर MR वैक्सीन तक...अब बच्चों के वैक्सीन की कीमतें बढ़ीं!

 
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बच्चों को लगाई जाने वाली कुछ महत्वपूर्ण वैक्सीनों की कीमतों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की 147वीं बैठक में बीसीजी (BCG), खसरा (Measles) और एमआर (Measles-Rubella) वैक्सीन की सीलिंग प्राइस में संशोधन का फैसला लिया गया। ये तीनों टीके राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम का अहम हिस्सा हैं और बच्चों को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को इस फैसले से घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसका उद्देश्य जरूरी वैक्सीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, न कि लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना।

किन वैक्सीनों की बढ़ी कीमत?

एनपीपीए द्वारा जिन वैक्सीनों की कीमतों में संशोधन किया गया है, उनमें बीसीजी, खसरा और एमआर वैक्सीन शामिल हैं। बीसीजी वैक्सीन नवजात शिशुओं को तपेदिक (टीबी) के गंभीर रूपों से बचाने के लिए जन्म के तुरंत बाद लगाई जाती है। वहीं खसरा और एमआर वैक्सीन बच्चों को खसरा और रूबेला जैसी संक्रामक बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करती हैं।

बच्चों के लिए क्यों जरूरी हैं ये टीके?

बीसीजी वैक्सीन: यह टीका बच्चों को टीबी के गंभीर संक्रमण से बचाने में मदद करता है और जन्म के बाद शुरुआती दिनों में लगाया जाता है।

खसरा वैक्सीन: खसरा एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जिससे तेज बुखार, त्वचा पर दाने, निमोनिया और अन्य जटिलताएं हो सकती हैं।

एमआर वैक्सीन: यह टीका खसरे के साथ-साथ रूबेला संक्रमण से भी सुरक्षा देता है। गर्भवती महिलाओं में रूबेला संक्रमण होने पर नवजात शिशु में गंभीर जन्मजात विकार हो सकते हैं।

कीमतें बढ़ाने की क्या है वजह?

एनपीपीए के अनुसार, इन वैक्सीनों का उत्पादन करने वाली कंपनियों की संख्या सीमित है और उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। यदि कीमतों में संशोधन नहीं किया जाता तो भविष्य में इनकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती थी। इसलिए यह निर्णय देशभर में जरूरी टीकों की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए लिया गया है।

कैंसर की दवाएं भी हुईं महंगी

वैक्सीनों के अलावा कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दो प्रमुख कीमोथेरेपी दवाओं-कार्बोप्लैटिन (Carboplatin) और सिस्प्लैटिन (Cisplatin) की सीलिंग प्राइस में भी 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की मंजूरी दी गई है। प्राधिकरण का कहना है कि इन दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (API) की कीमतों में वृद्धि के कारण यह कदम उठाया गया है।

एंटी-टिटनेस इंजेक्शन के दाम भी बढ़े

एनपीपीए ने एंटी-टिटनेस इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन की कीमतों में भी 50 प्रतिशत तक वृद्धि की अनुमति दी है। 250 IU और 500 IU क्षमता वाले इन इंजेक्शनों का उत्पादन करने वाली कंपनियां लंबे समय से बढ़ती लागत का हवाला देकर कीमतों में संशोधन की मांग कर रही थीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला जरूरी दवाओं और वैक्सीनों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है, ताकि देश के टीकाकरण और स्वास्थ्य कार्यक्रमों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।