भारत-EU ट्रेड डील पर लगी मुहर: क्यों अहम है यह समझौता, किसे मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
भारत और 27 देशों वाले EU के बीच मुक्त व्यापार समझौता तय हो गया है। 30 अरब डॉलर के भारतीय निर्यात पर शुल्क खत्म होगा। ऑटो, टेक्सटाइल और सर्विस सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
India EU Trade Deal: भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच लंबे समय से चली आ रही मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता आखिरकार पूरी हो गई है। मंगलवार को दोनों पक्ष वार्ता पूर्ण होने से संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करेंगे। समझौते के लागू होते ही भारत के लगभग 10 प्रतिशत निर्यातित उत्पादों पर EU में कोई शुल्क नहीं लगेगा, जबकि EU से आने वाले करीब 30 प्रतिशत उत्पाद पहले वर्ष में ही शुल्क मुक्त होंगे। हालांकि, इस व्यापार समझौते को ज़मीनी स्तर पर लागू होने में 10 से 12 महीने का समय लग सकता है।
तीन हफ्ते में सार्वजनिक होगा मसौदा
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को बताया कि दस्तावेज पर हस्ताक्षर के करीब तीन सप्ताह बाद समझौते का मसौदा सार्वजनिक किया जाएगा। इसके बाद कानूनी समीक्षा के उपरांत दोनों पक्ष अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे और अमल की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने कहा कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को नई गति देगा।
निर्यात सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा
EU के साथ समझौते के तहत कृषि आधारित उत्पादों, लेदर फुटवियर, केमिकल्स और टेक्सटाइल जैसे सेक्टरों में शुल्क समाप्त होने से भारतीय निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है। EU सालाना करीब 3 लाख करोड़ डॉलर का वस्तु आयात करता है, जिसमें भारत के लिए अपना हिस्सा बढ़ाने का बड़ा अवसर खुलेगा।
दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के संवेदनशील क्षेत्रों को समझौते से बाहर रखा है। भारत ने अपने कृषि और डेरी सेक्टर को EU के लिए नहीं खोला है, जबकि EU ने भी अनाज और मांस उत्पादों को शुल्क मुक्त नहीं किया है।
सर्विस सेक्टर में ऐतिहासिक खुलापन
इस समझौते में सर्विस सेक्टर को भी शामिल किया गया है। EU ने 140 से अधिक सब-सर्विस सेक्टर भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए खोलने का वादा किया है। वहीं भारत भी EU के लिए 102 सर्विस सेक्टर खोलेगा, जिससे IT, कंसल्टेंसी और प्रोफेशनल सेवाओं को बड़ा लाभ मिलेगा।
अमेरिकी टैरिफ के बाद और अहम
पिछले 17 वर्षों से अटकी यह वार्ता कई बार टूट चुकी थी। वर्ष 2013 में EU की ऑटो सेक्टर में छूट की मांग के कारण बातचीत रुक गई थी। इस बार महंगी कारों पर सीमित रियायत देकर रास्ता निकाला गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाए जाने के बाद EU के साथ यह समझौता और भी अहम हो गया है, क्योंकि कई रोजगारपरक सेक्टरों का निर्यात अमेरिकी बाजार में प्रभावित हुआ है।
EU कारें और वाइन हो सकती हैं सस्ती
सूत्रों के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि भारत, EU से आयातित कारों पर शुल्क को 110 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करने पर सहमत हो सकता है। आगे चलकर इसे 10 प्रतिशत तक लाया जा सकता है। इससे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और BMW जैसी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार आसान होगा। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों पर पहले पांच वर्षों तक टैरिफ में कोई कटौती नहीं होगी। EU की वाइन भी भारत में सस्ती हो सकती है, वहीं भारतीय वाइन उत्पादकों को यूरोप में निर्यात का मौका मिलेगा।
