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भारत ने रचा इतिहास! श्रीहरिकोटा से लॉन्च हुआ पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1, जानिए इसकी 7 बड़ी खूबियां

भारत के पहले प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' ने श्रीहरिकोटा से सफल उड़ान भरकर इतिहास रच दिया। स्काईरूट एयरोस्पेस के मिशन आगमन की सफलता के साथ भारत के निजी स्पेस सेक्टर को नई पहचान मिली। जानिए विक्रम-1 की खासियत, क्षमता और प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया।
 
Vikram-1 Rocket
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Vikram-1 Rocket: भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। देश का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट 'विक्रम-1' सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरने वाला यह रॉकेट भारतीय निजी अंतरिक्ष उद्योग के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है। हैदराबाद की स्पेस स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित इस रॉकेट की पहली उड़ान को 'मिशन आगमन' नाम दिया गया है।

यह लॉन्च केवल एक तकनीकी सफलता नहीं, बल्कि भारत के तेजी से उभरते निजी स्पेस इकोसिस्टम की नई शुरुआत भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश में अंतरिक्ष तकनीक, स्टार्टअप इनोवेशन और वैश्विक लॉन्च सेवाओं के क्षेत्र में नए अवसर खुलेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- यह ऐतिहासिक नई शुरुआत

लॉन्च से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को शुभकामनाएं देते हुए इसे भारत की अंतरिक्ष यात्रा की 'ऐतिहासिक नई शुरुआत' बताया। उन्होंने कहा कि यह मिशन देश के युवाओं की प्रतिभा, नवाचार और उद्यमिता का प्रतीक है तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों का सकारात्मक परिणाम भी है।


प्रधानमंत्री ने देशवासियों, विशेषकर युवाओं से इस ऐतिहासिक मिशन से जुड़ने और #IndiaWithVikram1 अभियान का हिस्सा बनने की अपील भी की।

भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए क्यों खास है 'विक्रम-1'?

'विक्रम-1' भारत का पहला ऐसा निजी ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है, जिसे किसी भारतीय निजी कंपनी ने डिजाइन और विकसित किया है। इस मिशन की सफलता से यह स्पष्ट हो गया है कि अब भारत का निजी अंतरिक्ष उद्योग भी वैश्विक लॉन्च बाजार में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

'विक्रम-1' की खूबियां

  • यह रॉकेट पृथ्वी से करीब 450 किलोमीटर ऊंचाई पर विभिन्न तकनीकी पेलोड स्थापित करने में सक्षम है।
  • इसकी 350 किलोग्राम तक पेलोड क्षमता है।
  • यह भारत का पहला ऑर्बिटल रॉकेट है जिसे पूरी तरह हल्के और मजबूत कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर से तैयार किया गया है।
  • कार्बन फाइबर के इस्तेमाल से रॉकेट का वजन कम हुआ है, जबकि मजबूती कई गुना बढ़ी है।
  • इसमें स्काईरूट द्वारा विकसित स्वदेशी इंजन लगाए गए हैं, जिनमें आधुनिक 3D प्रिंटेड इंजन भी शामिल हैं।
  • मिशन के साथ एक विशेष 18 कैरेट सोने से निर्मित माइक्रो आर्ट पीस भी अंतरिक्ष में भेजा गया है।
  • रॉकेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हस्तलिखित पोस्टकार्ड भी शामिल किया गया, जिसने इस मिशन को और यादगार बना दिया।

डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया नाम

इस रॉकेट का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में 'विक्रम-1' रखा गया है। स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने लॉन्च व्हीकल्स की पूरी श्रृंखला को उनके नाम से जोड़ने का निर्णय लिया है। कंपनी का मानना है कि डॉ. साराभाई की दूरदृष्टि और वैज्ञानिक सोच ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की मजबूत नींव रखी, जिसे आज निजी क्षेत्र नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है।

भारत के स्पेस इकोनॉमी को मिलेगी नई रफ्तार

'मिशन आगमन' की सफलता के साथ भारत ने यह संकेत दिया है कि अब अंतरिक्ष अनुसंधान केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं रहेगा। निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी से देश की स्पेस इकोनॉमी को गति मिलेगी, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और भारत वैश्विक सैटेलाइट लॉन्च बाजार में अपनी हिस्सेदारी मजबूत कर सकेगा। 'विक्रम-1' की सफल उड़ान इसी परिवर्तन की मजबूत शुरुआत मानी जा रही है।