अब बॉन्ड भी होंगे डिजिटल! सितंबर में आएगा भारत का पहला Tokenised Bond, जानिए कैसे करेगा काम
Tokenised Bonds India: भारत अब बॉन्ड मार्केट में ब्लॉकचेन तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। देश में पहली बार Tokenised Corporate Bonds का पायलट इश्यू सितंबर 2026 में लॉन्च होने की तैयारी है। यह इश्यू सरकारी पावर फाइनेंसर REC की ओर से लाया जाएगा और इसकी कुल राशि 500 करोड़ रुपये से कम रहने की उम्मीद है। इस पायलट का मकसद बॉन्ड की खरीद-बिक्री और सेटलमेंट को ब्लॉकचेन तकनीक के जरिए तेज करना है।
सितंबर में लॉन्च होगा पहला Tokenised Bond
भारत का पहला टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड इश्यू सितंबर में पेश किए जाने की उम्मीद है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले की जानकारी रखने वाले तीन लोगों ने बताया कि पायलट इश्यू REC (Rural Electrification Corporation) की ओर से जारी किया जाएगा।
यह इश्यू ₹500 करोड़ से कम, यानी करीब 57 मिलियन डॉलर का होगा। शुरुआत में इसे सभी निवेशकों के लिए उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। पायलट चरण में केवल चुनिंदा निवेशक ही इसमें हिस्सा ले सकेंगे।
इस इश्यू को मुंबई में सितंबर में होने वाले एक वार्षिक फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी कार्यक्रम में पेश किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, संबंधित संस्थाओं की ओर से इस पर अभी आधिकारिक तौर पर विस्तृत घोषणा नहीं की गई है और पायलट का फ्रेमवर्क अभी बातचीत के दौर में है।
Tokenised Bond आखिर होता क्या है?
साधारण भाषा में समझें तो Tokenised Bond एक ऐसा डिजिटल सिक्योरिटी इंस्ट्रूमेंट है, जिसमें बॉन्ड के जारी होने, मालिकाना हक, ट्रेडिंग और सेटलमेंट का रिकॉर्ड ब्लॉकचेन या Distributed Ledger Technology पर रखा जाता है।
पारंपरिक बॉन्ड लेनदेन में रिकॉर्डिंग और सेटलमेंट की प्रक्रिया में समय लग सकता है। टोकनाइजेशन के जरिए इन प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाया जाता है, जिससे लेनदेन का सेटलमेंट लगभग तुरंत किया जा सकता है। यही वजह है कि भारत के इस पायलट को बॉन्ड मार्केट में ब्लॉकचेन के इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग माना जा रहा है।
RBI और SEBI मिलकर कर रहे हैं काम
इस पायलट के पीछे Reserve Bank of India (RBI) और Securities and Exchange Board of India (SEBI) के बीच सहयोग की बात सामने आई है।
Reuters के मुताबिक दोनों नियामक इस तकनीक को लेकर काम कर रहे हैं। हालांकि, इस समय पूरा फ्रेमवर्क अंतिम रूप में नहीं है और इसमें बदलाव की संभावना बनी हुई है। RBI, SEBI और REC ने Reuters के सवालों का तत्काल जवाब नहीं दिया।
बॉन्ड खरीदने में CBDC का होगा इस्तेमाल
इस पायलट की सबसे खास बात यह है कि टोकनाइज्ड बॉन्ड खरीदने के लिए भारत की Central Bank Digital Currency यानी CBDC का इस्तेमाल किया जाएगा।
निवेशकों को इसके लिए दो तरह के डिजिटल अकाउंट की जरूरत होगी। पहला होगा बैंक की ओर से उपलब्ध कराया जाने वाला Wholesale CBDC Wallet, जबकि दूसरा होगा टोकनाइज्ड सिक्योरिटीज रखने के लिए नया इलेक्ट्रॉनिक सिक्योरिटीज वॉलेट। यानी इस पायलट में सिर्फ बॉन्ड को डिजिटल बनाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उसकी खरीद और सेटलमेंट को भी डिजिटल करेंसी के जरिए जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
क्या है DEMAT 2.0?
भारतीय डिपॉजिटरीज एक नए इलेक्ट्रॉनिक सिक्योरिटीज वॉलेट पर काम कर रही हैं, जिसे DEMAT 2.0 कहा जा रहा है। इस वॉलेट में टोकनाइज्ड बॉन्ड की होल्डिंग का रिकॉर्ड Distributed Ledger Technology पर रखा जाएगा।
इस व्यवस्था में आगे होने वाली ट्रेडिंग के लिए निवेशक के पास compatible CBDC wallet और securities wallet दोनों होना जरूरी होगा। यानी जिस सिस्टम के तहत ये बॉन्ड जारी होंगे, उसी डिजिटल ढांचे के भीतर आगे की खरीद-बिक्री होगी।
तीन महीने का लॉक-इन, दिसंबर तक बन सकता है Secondary Market
पायलट टोकनाइज्ड बॉन्ड में निवेश करने वालों के लिए शुरुआती तीन महीने का लॉक-इन पीरियड रखा जाएगा। इसके बाद इन सिक्योरिटीज की खरीद-बिक्री के लिए सेकेंडरी मार्केट विकसित करने की योजना है। सूत्रों के मुताबिक स्टॉक एक्सचेंज दिसंबर 2026 तक टोकनाइज्ड बॉन्ड के लिए सेकेंडरी मार्केट तैयार करने की दिशा में काम कर सकते हैं।
फिलहाल ये बॉन्ड पारंपरिक Electronic Book Provider प्लेटफॉर्म पर ट्रेड नहीं किए जाएंगे। इसके बजाय इनके लिए तैयार किए जा रहे नए ब्लॉकचेन आधारित सिस्टम का इस्तेमाल होगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह कदम?
भारत पहले ही डिजिटल पेमेंट और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ चुका है। अब बॉन्ड मार्केट में ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल उसी डिजिटल बदलाव का अगला चरण माना जा सकता है।
Tokenisation से सिक्योरिटीज के मालिकाना हक और लेनदेन का रिकॉर्ड एक साझा डिजिटल लेजर पर दर्ज किया जा सकता है। इससे सेटलमेंट प्रक्रिया तेज करने और कई प्रक्रियाओं को ऑटोमेट करने की संभावना बनती है। भारत का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब यूरोप और हांगकांग जैसे बाजार भी बॉन्ड जारी करने और सेटलमेंट में ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल तलाश रहे हैं।
अभी आम निवेशकों के लिए नहीं है यह बॉन्ड
यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि सितंबर में प्रस्तावित यह इश्यू पायलट प्रोजेक्ट है। शुरुआत में इसे चुनिंदा निवेशकों के लिए ही उपलब्ध कराने की योजना है। इसलिए फिलहाल इसे ऐसा बॉन्ड नहीं समझना चाहिए जिसे कोई भी सामान्य निवेशक अपने मौजूदा डीमैट अकाउंट या सामान्य बॉन्ड प्लेटफॉर्म से खरीद सकेगा।
पायलट के जरिए नियामक और बाजार से जुड़े संस्थान यह देखेंगे कि ब्लॉकचेन आधारित सिक्योरिटीज, CBDC पेमेंट और डिजिटल सिक्योरिटीज वॉलेट एक साथ किस तरह काम करते हैं।
भारत का बॉन्ड मार्केट कितनी तेजी से बदलेगा?
पहला इश्यू आकार में छोटा है, लेकिन इसका महत्व रकम से ज्यादा तकनीक और भविष्य की व्यवस्था को लेकर है। अगर पायलट सफल रहता है तो आगे चलकर टोकनाइज्ड सिक्योरिटीज के इस्तेमाल का दायरा बढ़ सकता है।
हालांकि, इस दिशा में कई सवाल अभी बाकी हैं- जैसे सेकेंडरी मार्केट में पर्याप्त लिक्विडिटी, डिजिटल वॉलेट की पहुंच, नियामकीय ढांचा और अलग-अलग सिस्टम के बीच interoperability। इसलिए सितंबर का यह पायलट भारत के लिए सिर्फ एक नया बॉन्ड इश्यू नहीं, बल्कि ब्लॉकचेन आधारित सिक्योरिटी मार्केट की वास्तविक टेस्टिंग भी होगा।
