भारत बना हथियारों का बड़ा सप्लायर! यूरोप से इजराइल तक पहुंच रहे स्वदेशी रक्षा उत्पाद, ब्रह्मोस की भी बढ़ी मांग
भारत की पहचान लंबे समय तक दुनिया के बड़े हथियार आयातकों में होती रही है। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। देश का रक्षा उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है और भारत दूसरे देशों को मिसाइल, गोला-बारूद और अन्य सैन्य उपकरणों की आपूर्ति करने वाले देशों में अपनी जगह मजबूत कर रहा है। यूरोप से लेकर एशिया तक भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लेकर तोप के गोलों तक, भारत के रक्षा निर्यात का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने एक साल में यूरोप को 8,000 करोड़ रुपये से अधिक के रक्षा उत्पाद बेचे। वहीं, ब्रह्मोस मिसाइल को लेकर फिलीपींस, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों की दिलचस्पी भी भारतीय रक्षा उद्योग के लिए अहम मानी जा रही है। ऐसे में सवाल है कि भारत हथियारों का निर्यात करने वाला देश कैसे बना और किन देशों तक उसके रक्षा उत्पाद पहुंच रहे हैं?
इजराइल को दो साल में 630 करोड़ रुपये के गोला-बारूद की सप्लाई
भारत के रक्षा निर्यात का दायरा इजराइल तक भी पहुंचा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मार्च 2026 तक के दो वर्षों में भारत ने इजराइल को करीब 630 करोड़ रुपये के गोला-बारूद और विस्फोटक भेजे। इनमें तोप और मोर्टार के गोले भी शामिल बताए गए हैं।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इन दो वर्षों में इजराइल को भेजे गए रक्षा उत्पादों का मूल्य इससे पहले के छह वर्षों के कुल निर्यात के बराबर था। यह आंकड़ा भारत के रक्षा उत्पादन और निर्यात में आए बदलाव की ओर इशारा करता है।
फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल बेचकर भारत ने बनाया रिकॉर्ड
भारतीय रक्षा उद्योग की बड़ी उपलब्धियों में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का निर्यात भी शामिल है। 19 अप्रैल 2024 को भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइलों की पहली खेप सौंपी थी। इसके साथ ही फिलीपींस भारत से इस मिसाइल को खरीदने वाला पहला विदेशी देश बना।
जनवरी 2022 में दोनों देशों के बीच करीब 37.5 करोड़ डॉलर यानी उस समय लगभग 3,130 करोड़ रुपये का समझौता हुआ था। यह सौदा भारत के रक्षा निर्यात के लिए महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि इससे स्वदेशी मिसाइल तकनीक को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थापित करने का अवसर मिला।
अब ब्रह्मोस की मांग को लेकर इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों के नाम भी सामने आ रहे हैं। यदि इन देशों के साथ समझौते आगे बढ़ते हैं, तो दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रक्षा साझेदारी और मजबूत हो सकती है।
म्यांमार रहा भारत से हथियार खरीदने वाला प्रमुख देश
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2000 से 2023 के बीच म्यांमार भारत से हथियार खरीदने वाला प्रमुख देश रहा। इस अवधि में भारत के हथियार निर्यात में म्यांमार की हिस्सेदारी करीब 31 प्रतिशत बताई गई है।
यह आंकड़ा बताता है कि भारत का रक्षा निर्यात केवल बड़े और विकसित देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पड़ोसी और क्षेत्रीय देशों के साथ भी उसके सैन्य उपकरणों का कारोबार बढ़ा है।
रूस भी भारतीय गोला-बारूद खरीदने के दावे के केंद्र में
रूस लंबे समय से भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार रहा है। हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक हथियार बाजार में कई बदलाव आए हैं। इसी संदर्भ में मई 2024 में लाइव मिंट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रूस ने पिछले छह से आठ महीनों के दौरान भारत से करीब 33,000 करोड़ रुपये के गोला-बारूद और अन्य रक्षा संबंधी सामान खरीदे।
इस दावे को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि रिपोर्ट में बताई गई रकम और खरीद की अवधि की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इसलिए इसे अंतिम और निर्विवाद आंकड़े के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
भारत के लिए क्यों अहम है रक्षा निर्यात?
रक्षा निर्यात में बढ़ोतरी का मतलब सिर्फ हथियारों की बिक्री नहीं है। इससे घरेलू रक्षा कंपनियों को नए बाजार मिलते हैं, उत्पादन क्षमता बढ़ती है और तकनीकी विकास को प्रोत्साहन मिलता है। साथ ही, दूसरे देशों के साथ रक्षा सहयोग मजबूत होने से भारत की रणनीतिक भूमिका भी बढ़ सकती है।
हालांकि, भारत के रक्षा निर्यात से जुड़े अलग-अलग आंकड़ों की तुलना करते समय उनकी अवधि, उत्पादों की श्रेणी और स्रोत को ध्यान में रखना जरूरी है। कुल मिलाकर, स्वदेशी मिसाइलों, गोला-बारूद और सैन्य उपकरणों की विदेशी मांग भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर दे रही है।
