भारत बना मेडिकल टूरिज्म का उभरता हब, 2030 तक 16.2 अरब डॉलर का बाजार बनने का अनुमान
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि भारत तेजी से मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (एमवीटी) यानी मेडिकल टूरिज्म का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनकर उभर रहा है। अनुमान के अनुसार, भारत का चिकित्सा पर्यटन बाजार 2025 में करीब 8.7 अरब डॉलर का है, जो 2030 तक लगभग दोगुना होकर 16.2 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
सरकार के अनुसार, वैश्विक मेडिकल टूरिज्म बाजार का आकार 2022 में करीब 115.6 अरब डॉलर था और इसके 2030 तक 10.8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर 286.1 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।
आधिकारिक बयान में कहा गया है कि दुनिया भर में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत, लंबा इंतजार और लाइफस्टाइल बीमारियों का बढ़ता दबाव मरीजों को इलाज के लिए विदेश जाने को मजबूर कर रहा है। ऐसे में भारत में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ योग और आयुर्वेद जैसी पारंपरिक आयुष प्रणालियों का समावेश मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा दे रहा है।
सरकार ने बताया कि आयुष वीजा, डिजिटल हेल्थ सुविधाएं और क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों जैसी पहल इस सेक्टर को मजबूती दे रही हैं। भारत का मेडिकल टूरिज्म इकोसिस्टम दो प्रमुख हिस्सों में बंटा है—एक उन्नत चिकित्सा उपचार और दूसरा वेलनेस टूरिज्म, जिसमें योग और आयुर्वेद शामिल हैं।
विदेशी मरीजों का रुझान बढ़ा
साल 2025 में भारत में कुल 91.5 करोड़ विदेशी पर्यटक आए, जिनमें से 5,07,244 लोग इलाज के लिए पहुंचे। यह कुल विदेशी पर्यटकों का लगभग 5.5 प्रतिशत है।
चिकित्सा पर्यटन के लिए भारत आने वाले प्रमुख देशों में बांग्लादेश सबसे ऊपर रहा, जहां से 3,25,127 मरीज आए। इसके बाद इराक (30,989), उज्बेकिस्तान (13,699), सोमालिया (11,506), तुर्कमेनिस्तान (10,231), ओमान (9,738) और केन्या (9,357) का स्थान रहा।
वैश्विक रैंकिंग में भारत
मेडिकल टूरिज्म इंडेक्स 2020-21 के अनुसार, भारत दुनिया के शीर्ष 46 मेडिकल टूरिज्म गंतव्यों में 10वें स्थान पर है, जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में वेलनेस टूरिज्म के मामले में पांचवें स्थान पर रहा।
देश की स्वास्थ्य सेवाएं एनएबीएच (राष्ट्रीय अस्पताल और स्वास्थ्य सेवा प्रदाता प्रत्यायन बोर्ड) जैसे संस्थानों द्वारा निर्धारित कड़े गुणवत्ता मानकों और अंतरराष्ट्रीय मान्यता के कारण भरोसेमंद मानी जाती हैं।
भविष्य की योजना
सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। इन केंद्रों में आधुनिक चिकित्सा, शिक्षा और अनुसंधान के साथ आयुष सेवाएं भी उपलब्ध होंगी, जिससे भारत के मेडिकल टूरिज्म सेक्टर को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
