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भारत-जापान मिलकर बनाएंगे AI और सेमीकंडक्टर की ग्लोबल सप्लाई चेन, MSME को भी मिलेगी हाईटेक ट्रेनिंग

भारत और जापान AI व सेमीकंडक्टर की ग्लोबल सप्लाई चेन तैयार करने के लिए साथ आए हैं। जापान की करीब 20 कंपनियों ने भारत में निवेश में रुचि दिखाई है। BIS सर्टिफिकेशन में राहत, 11 जापानी इंडस्ट्रियल टाउनशिप, भारतीय MSME को ट्रेनिंग और रेयर अर्थ मिनरल्स पर सहयोग की संभावनाएं भी तलाश रही हैं।
 
India Japan Semiconductor Partnership
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India Japan Semiconductor Partnership: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भारत और जापान के बीच सहयोग अब अगले चरण में पहुंच रहा है। ग्लोबल साउथ और कम आय वाले देशों के लिए AI व सेमीकंडक्टर की सप्लाई चेन तैयार करने के लिए दोनों देश मिलकर काम करेंगे। मंगलवार को AI और सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़ी जापान की करीब 20 कंपनियों ने भारत में निवेश को लेकर अपनी रुचि जाहिर की।

यह पहल उस सहमति को आगे बढ़ाने की दिशा में है, जिस पर भारत और जापान ने 2023 में AI और सेमीकंडक्टर से जुड़े सहयोग को लेकर सहमति जताई थी।

20 जापानी कंपनियों ने भारत में निवेश में दिखाई दिलचस्पी

मंगलवार को जापानी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक की। इस दौरान कंपनियों ने भारत में AI और सेमीकंडक्टर से जुड़े निर्माण और निवेश के अवसरों पर चर्चा की।

बैठक में कंपनियों की ओर से भारत में कारोबार शुरू करने में आने वाली कुछ व्यावहारिक दिक्कतों को भी सामने रखा गया। इनमें खास तौर पर सेमीकंडक्टर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और उनके पार्ट्स के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) से प्रमाणन की जरूरत का मुद्दा शामिल था।

BIS सर्टिफिकेशन में मिल सकती है छूट

सेमीकंडक्टर उत्पादन के उपकरण बनाने वाली जापानी कंपनी टोक्यो इलेक्ट्रॉन लिमिटेड ने बताया कि भारत में निर्माण के दौरान इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स और उपकरणों को लाने के लिए BIS सर्टिफिकेशन अनिवार्य है। कंपनी के मुताबिक, यह प्रक्रिया भारत में उत्पादन शुरू करने में एक बाधा बन रही है।

अन्य जापानी कंपनियों ने भी इसी तरह की चिंताएं सामने रखीं।

इस पर पीयूष गोयल ने कहा कि मेक इन इंडिया के तहत AI और सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़े उपकरणों के आयात के लिए BIS सर्टिफिकेशन से छूट देने के संबंध में जल्द नियम लाए जा सकते हैं। यह सुविधा सिर्फ जापानी कंपनियों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पात्र अन्य कंपनियों को भी इसका लाभ मिल सकता है।

उन्होंने बताया कि यह छूट कंपनी या पूरे सेक्टर के आधार पर देने पर विचार किया जा सकता है। अंतिम फैसला BIS और संबंधित मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया जाएगा।

2032 तक 150 अरब डॉलर का सेमीकंडक्टर कारोबार

बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने जापानी कंपनियों को भारत में तैयार हो रहे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश के 300 से अधिक विश्वविद्यालयों में करीब 68 हजार इंजीनियरिंग छात्रों को चिप डिजाइनिंग की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। सरकार का लक्ष्य भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को तेजी से विस्तार देना है। गोयल के मुताबिक, 2032 तक भारत में सेमीकंडक्टर कारोबार 150 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

यह लक्ष्य भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और चिप निर्माण में अपनी घरेलू क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक सप्लाई चेन में भी बड़ी भूमिका हासिल करना चाहता है।

जापानी कंपनी भारतीय स्टार्टअप्स के साथ कर रही बातचीत

AI निर्माण से जुड़ी जापानी कंपनी अबेजा (ABEJA) के CEO यूसुके ओकाडा ने बताया कि उनकी कंपनी भारत के कई स्टार्टअप्स के साथ बातचीत कर रही है। कंपनी AI मॉडल तैयार करने में सहयोग की संभावनाएं तलाश रही है। ओकाडा के मुताबिक, कंपनी जल्द ही भारत में अपने निवेश से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक कर सकती है।

इससे संकेत मिलता है कि जापानी कंपनियों की दिलचस्पी केवल पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि AI मॉडल, स्टार्टअप और नई तकनीक के क्षेत्र में भी साझेदारी की संभावनाएं तलाश रही हैं।

जापानी कंपनियों के लिए तैयार हो रहे 11 इंडस्ट्रियल टाउनशिप

इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन राजेश एम. रेवानकर ने बताया कि जापानी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से 11 जापानी औद्योगिक टाउनशिप विकसित की जा रही हैं।

सरकार इन औद्योगिक क्षेत्रों में जापानी कंपनियों को विशेष आर्थिक क्षेत्र जैसी कुछ सुविधाएं देने पर भी विचार कर सकती है। इसका उद्देश्य भारत में जापानी निवेश के लिए बेहतर कारोबारी माहौल तैयार करना है।

भारतीय MSME को ट्रेनिंग देंगी जापानी कंपनियां

भारत-जापान सहयोग का एक अहम हिस्सा भारतीय MSME सेक्टर को तकनीकी रूप से मजबूत करना भी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री के साथ आए उद्यमियों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे FICCI अध्यक्ष और RPG समूह के वाइस चेयरमैन अनंत गोयनका ने बताया कि भारत और जापान की कंपनियां अफ्रीकी देशों और दूसरे कम आय वाले देशों के लिए हाईटेक सेक्टर में संयुक्त रूप से निर्माण की संभावनाएं तलाश रही हैं।

इसके साथ ही जापान की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की ओर से भारतीय MSME को प्रशिक्षण देने पर भी चर्चा हो रही है। इससे स्थानीय कंपनियों की तकनीकी क्षमता और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

AI-सेमीकंडक्टर के साथ रेयर अर्थ मिनरल्स पर भी सहयोग

भारत और जापान के बीच सहयोग केवल AI और सेमीकंडक्टर तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों देश रेयर अर्थ मिनरल्स की उपलब्धता और सप्लाई को लेकर भी सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं। सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और कई आधुनिक तकनीकों के लिए रेयर अर्थ मिनरल्स महत्वपूर्ण कच्चा माल हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में सहयोग भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।