Track 2 या सिर्फ अफवाह? भारत-पाकिस्तान के बीच फिर शुरू हुई बैकडोर हलचल, कोलंबो मीटिंग में क्या हुआ
India Pakistan Track 2 Diplomacy: ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे माहौल में श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच कथित बातचीत की खबरों ने नई चर्चा छेड़ दी है। पाकिस्तान के एक प्रमुख अखबार ने दावा किया कि दोनों देशों के बीच Track 1.5 Diplomacy के तहत बातचीत हुई, जबकि भारत की ओर से इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया गया है।
पाकिस्तानी मीडिया का दावा, कोलंबो में हुई Track 1.5 बातचीत
पाकिस्तान के अखबार The Express Tribune ने दावा किया कि कोलंबो में आयोजित एक सुरक्षा सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच Track 1.5 स्तर की बातचीत हुई। रिपोर्ट के मुताबिक इस बैठक में सेवारत अधिकारियों के साथ पूर्व राजनयिक, रिटायर्ड सैन्य अधिकारी और राजनीतिक प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
अखबार ने इसे दोनों देशों के बीच हाल के समय की महत्वपूर्ण अनौपचारिक कूटनीतिक पहल बताया।
भारतीय मीडिया ने बताया Track-2 संवाद
कुछ भारतीय मीडिया रिपोर्टों में इस बैठक को Track-2 Dialogue बताया गया। इन रिपोर्टों के अनुसार भारतीय प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव, पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे और पूर्व राजनयिक रुचि घनश्याम शामिल थे।
वहीं पाकिस्तानी पक्ष में विदेश मंत्रालय के अधिकारी सज्जाद हैदर खान, पूर्व सीनेटर शेरी रहमान और रिटायर्ड मेजर जनरल इस्फंदियार अली खान पटौदी के शामिल होने का दावा किया गया।
रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि सम्मेलन के दौरान दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री एस. पॉल कपूर ने प्रतिभागियों के साथ विशेष रात्रिभोज में हिस्सा लिया।
राम माधव ने किया साफ इनकार
कोलंबो बैठक को भारत-पाकिस्तान वार्ता बताए जाने पर भाजपा नेता राम माधव ने स्पष्ट शब्दों में इन खबरों को गलत बताया।
उन्होंने कहा कि यह किसी भी प्रकार की Track-2 या Track-1.5 वार्ता नहीं थी, बल्कि International Institute for Strategic Studies (IISS) द्वारा आयोजित वार्षिक दक्षिण एशिया सम्मेलन था, जिसमें भारत, श्रीलंका, अमेरिका, ब्रिटेन, अफगानिस्तान और पाकिस्तान समेत कई देशों के विशेषज्ञ, अधिकारी और शोधकर्ता शामिल हुए थे।
राम माधव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि इस कार्यक्रम को भारत-पाकिस्तान द्विपक्षीय वार्ता के रूप में पेश करना "पूरी तरह गलत और तथ्यों से परे" है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सबसे निचले स्तर पर हैं रिश्ते
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था।
इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में और अधिक तनाव आ गया। वर्तमान में दोनों देशों के बीच न तो औपचारिक कूटनीतिक वार्ता चल रही है और न ही नियमित व्यापारिक संबंध बहाल हैं। केवल सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) की हॉटलाइन संपर्क का एकमात्र आधिकारिक माध्यम बनी हुई है।
क्या होता है Track-1, Track-1.5 और Track-2 Diplomacy?
कूटनीति में इन तीनों शब्दों का अलग-अलग महत्व होता है। Track-1 Diplomacy वह होती है जिसमें दोनों देशों की सरकारें अपने अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से औपचारिक बातचीत करती हैं और इसके आधार पर समझौते या नीतिगत फैसले लिए जाते हैं।
Track-1.5 Diplomacy में सरकार के कुछ प्रतिनिधियों के साथ स्वतंत्र विशेषज्ञ, पूर्व अधिकारी और रणनीतिक मामलों के जानकार शामिल होते हैं। इसका उद्देश्य संवेदनशील मुद्दों पर अपेक्षाकृत लचीले माहौल में चर्चा करना होता है।
Track-2 Diplomacy पूरी तरह अनौपचारिक संवाद होता है, जिसमें पूर्व राजनयिक, सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी, शिक्षाविद, थिंक टैंक विशेषज्ञ और अन्य नागरिक भाग लेते हैं। इसमें कोई सरकारी निर्णय नहीं होता, बल्कि संवाद और विश्वास बहाली पर जोर दिया जाता है।
सुरक्षा विशेषज्ञों ने भी किया दावों पर सवाल
राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के जानकार और वरिष्ठ पत्रकार नितिन ए. गोखले ने भी इन खबरों पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि कोलंबो, मस्कट और बैंकॉक जैसे शहरों में वर्षों से अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक बहुपक्षीय सुरक्षा सम्मेलन आयोजित करते रहे हैं, जिनमें भारत और पाकिस्तान समेत कई देशों के प्रतिनिधि भाग लेते हैं। ऐसे कार्यक्रमों को भारत-पाकिस्तान के बीच नई Track-2 पहल बताना वास्तविकता से अलग है।
गोखले के मुताबिक यह सम्मेलन एक नियमित अंतरराष्ट्रीय मंच था, न कि दोनों देशों के बीच किसी नई शांति प्रक्रिया की शुरुआत।
क्या आगे बढ़ सकती है बातचीत?
फिलहाल भारत सरकार की ओर से भारत-पाकिस्तान के बीच किसी नई औपचारिक या अनौपचारिक वार्ता की पुष्टि नहीं की गई है। दूसरी ओर, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के एक अधिकारी ने भी मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें Track-1.5 वार्ता की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
ऐसे में कोलंबो सम्मेलन को लेकर सामने आए दावों और आधिकारिक प्रतिक्रियाओं के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। फिलहाल दोनों देशों के रिश्तों में किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं और ऑपरेशन सिंदूर के बाद बनी कूटनीतिक दूरी अभी भी बरकरार है।
