भारत को बड़ी राहत! पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होते ही सरकार ने हटाए गैस सप्लाई पर सभी बड़े प्रतिबंध
पश्चिम एशिया में हालात सामान्य होने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति दोबारा सुचारु होने के बाद केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस वितरण पर लागू अधिकांश आपातकालीन प्रतिबंध समाप्त कर दिए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश-2026 में संशोधन करते हुए उन विशेष प्रावधानों को वापस ले लिया है, जिनके तहत घरेलू और आयातित गैस का आवंटन सरकार की तय प्राथमिकताओं के आधार पर किया जा रहा था।
पश्चिम एशिया संकट के दौरान लागू किए गए थे आपात प्रावधान
सरकार ने यह व्यवस्था 9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लागू की थी। उस समय अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों तथा उसके जवाब में ईरान की कार्रवाई के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी की आवाजाही प्रभावित हो गई थी।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि कई अंतरराष्ट्रीय गैस आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर (Force Majeure) लागू कर दिया था। इससे भारत सहित कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर संकट गहराने की आशंका पैदा हो गई थी।
युद्धविराम के बाद सामान्य हुई गैस आपूर्ति
पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा है कि पश्चिम एशिया में अब युद्धविराम लागू है, संबंधित देशों के बीच बातचीत जारी है और होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात सामान्य हो चुका है। ऐसे में गैस आपूर्ति पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंधों को जारी रखने की अब आवश्यकता नहीं रह गई है।
भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 88 प्रतिशत और प्राकृतिक गैस की लगभग 50 प्रतिशत आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी करता है। देश में आयात होने वाले कच्चे तेल का लगभग 40 से 45 प्रतिशत और एलएनजी का करीब 65 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। यही कारण है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मानी जाती है।
संकट के समय सरकार ने उठाए थे तीन बड़े कदम
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए कई अस्थायी कदम उठाए थे। इनमें प्राकृतिक गैस आपूर्ति का नियंत्रण, रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक की जगह एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश और बड़े उपभोक्ताओं को डीजल बिक्री पर सीमाएं शामिल थीं। एलपीजी उत्पादन और डीजल बिक्री से जुड़े प्रतिबंध पहले ही हटाए जा चुके थे। अब प्राकृतिक गैस आपूर्ति से जुड़े विशेष प्रावधान भी समाप्त कर दिए गए हैं।
घरेलू उपभोक्ताओं को दी गई थी प्राथमिकता
आपातकालीन व्यवस्था के दौरान सरकार ने पाइप से मिलने वाली घरेलू गैस (PNG), सीएनजी, एलपीजी उत्पादन और गैस पाइपलाइन संचालन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी थी। उर्वरक संयंत्रों को उनकी औसत जरूरत का 70 प्रतिशत, जबकि औद्योगिक इकाइयों को लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जा रही थी। इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए गैस आधारित बिजलीघरों और पेट्रोकेमिकल उद्योगों की गैस आपूर्ति में कटौती की गई थी।
रिफाइनरियों और बिजलीघरों पर भी पड़ा था असर
संकट के दौरान तेल रिफाइनरियों को अपनी सामान्य गैस खपत का लगभग 65 प्रतिशत तक सीमित रहने के निर्देश दिए गए थे। वहीं सरकारी कंपनी गेल (GAIL) को गैस की पूलिंग, पुनर्वितरण और नई कीमत तय करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी, ताकि उपलब्ध गैस का संतुलित वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
अब सामान्य व्यवस्था में लौटेगा गैस वितरण
सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में स्थिति स्थिर होने और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने के बाद देश की गैस आपूर्ति व्यवस्था को फिर से सामान्य प्रणाली के तहत संचालित किया जाएगा। इससे उद्योग, ऊर्जा क्षेत्र और अन्य बड़े उपभोक्ताओं को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
