अब चीन पर नहीं रहेगी निर्भरता? भारतीय स्टार्टअप ने बना दी बिना Rare Earth Magnet वाली EV मोटर
बेंगलुरु स्थित Vimag Labs ने ऐसी इलेक्ट्रिक मोटर विकसित की है, जिसे Rare Earth Magnet की जरूरत नहीं पड़ती। कंपनी का दावा है कि सॉफ्टवेयर आधारित यह तकनीक चीन पर निर्भरता कम करेगी, EV की रेंज बढ़ाएगी और भारत को DeepTech व मैन्युफैक्चरिंग में नई बढ़त दिला सकती है।
Vimag Labs: इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की दुनिया में भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है, जो भविष्य की वैश्विक सप्लाई चेन का समीकरण बदल सकता है। बेंगलुरु स्थित डीप-टेक स्टार्टअप Vimag Labs ने ऐसी इलेक्ट्रिक मोटर विकसित की है, जिसे पारंपरिक Rare Earth Magnet की आवश्यकता नहीं पड़ती। कंपनी का दावा है कि उसकी Software-Defined Motor तकनीक चीन पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत और प्रदर्शन दोनों में बड़ा बदलाव ला सकती है।
एक संकट से जन्मा बड़ा आइडिया
Vimag Labs के सह-संस्थापक और CEO मनीष सेठ के अनुसार, वर्ष 2020 में कोविड महामारी के दौरान कंपनी के मोटर प्रोटोटाइप के लिए जरूरी मैग्नेट शंघाई बंदरगाह पर महीनों तक फंसे रहे। इसी अनुभव ने उन्हें ऐसी तकनीक विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जो Rare Earth Magnet पर निर्भर ही न हो।
कैसे काम करती है यह नई तकनीक?
आम इलेक्ट्रिक मोटरों में स्थायी मैग्नेट (Permanent Magnets) का इस्तेमाल होता है। Vimag Labs ने इसकी जगह कॉपर कॉइल, स्टील और एडवांस सॉफ्टवेयर एल्गोरिद्म का उपयोग किया है। कंपनी का कहना है कि उसका सॉफ्टवेयर मोटर के भीतर जरूरत के अनुसार चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) तैयार करता है, जिसे वह Software-Defined Magnet कहती है।
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मोटर की कार्यक्षमता को भविष्य में Over-the-Air (OTA) सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए भी बेहतर बनाया जा सकता है, जबकि पारंपरिक मैग्नेट वाली मोटरों में ऐसा संभव नहीं होता।
चीन की पकड़ क्यों है इतनी मजबूत?
दुनिया की अधिकांश हाई-परफॉर्मेंस इलेक्ट्रिक मोटरों में इस्तेमाल होने वाले Rare Earth Magnets के उत्पादन और प्रोसेसिंग पर चीन का दबदबा है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन वैश्विक Rare Earth सप्लाई चेन का लगभग 90% और उच्च क्षमता वाले मैग्नेट का करीब 94% हिस्सा नियंत्रित करता है। हाल के वर्षों में निर्यात नियंत्रण और सप्लाई संबंधी चुनौतियों ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।
भारत को क्या मिलेगा फायदा?
Vimag Labs का कहना है कि उसकी मोटर पूरी तरह कॉपर, स्टील और सामान्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स पर आधारित है, जिनका निर्माण भारत में किया जा सकता है। इससे भविष्य में भारत की इलेक्ट्रिक वाहन इंडस्ट्री को आयातित Rare Earth Magnet पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। साथ ही बैटरी की दक्षता और वाहन की ड्राइविंग रेंज में भी सुधार होने की संभावना है।
कई बड़े वाहन निर्माता कर रहे परीक्षण
कंपनी ने भले ही आधिकारिक तौर पर किसी ऑटोमोबाइल कंपनी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन उसके अनुसार उसकी तकनीक का परीक्षण भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहन कंपनियों के साथ चल रहा है। इसके अलावा यूरोप और अमेरिका के प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के लिए भी तकनीक को एकीकृत करने पर काम जारी है। कंपनी को उम्मीद है कि इस वर्ष के अंत तक 1,000 से 10,000 मोटरों की आपूर्ति की जा सकेगी।
पांच पेटेंट और नई निवेश योजना
Vimag Labs अब तक अपने Virtual Magnet Synchronous Motor (VMSM) प्लेटफॉर्म के लिए भारत में पांच पेटेंट हासिल कर चुकी है। कंपनी ने हाल ही में Series-A फंडिंग में लगभग 5 मिलियन डॉलर जुटाए हैं और अब विस्तार के लिए नए निवेश दौर की तैयारी कर रही है।
रक्षा और भविष्य की तकनीकों पर भी नजर
कंपनी का अगला लक्ष्य भारी इलेक्ट्रिक ट्रक, बस, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र के लिए इसी तकनीक पर आधारित समाधान विकसित करना है। इसके अलावा भविष्य में खुद का विशेष माइक्रोचिप (ASIC) विकसित करने की भी योजना है, जिससे मोटर की लागत और कम की जा सके।
भारत के लिए क्यों अहम है यह उपलब्धि?
यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है तो भारत केवल इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण में ही नहीं, बल्कि वैश्विक DeepTech, सेमीकंडक्टर और सप्लाई चेन आत्मनिर्भरता की दौड़ में भी मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है। ऐसे समय में जब Rare Earth संसाधनों को लेकर दुनिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, यह नवाचार भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
