India-US Trade Deal को लेकर किसानों का दिल्ली मार्च, जब समझौता हुआ ही नहीं तो विरोध क्यों?
भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के विरोध में देशभर के किसान दिल्ली पहुंचे। किसान संगठनों का दावा है कि यह समझौता कृषि, डेयरी, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है। जानिए किसान क्यों विरोध कर रहे हैं, उनकी प्रमुख मांगें क्या हैं और सरकार का रुख क्या है।
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों के किसान मंगलवार को दिल्ली पहुंचे, जहां किसान घाट पर आयोजित किसान महापंचायत में बड़ी संख्या में किसानों और किसान संगठनों ने हिस्सा लिया। किसानों का कहना है कि यदि यह समझौता मौजूदा स्वरूप में लागू हुआ तो इसका सबसे बड़ा असर देश के छोटे किसानों, डेयरी सेक्टर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
550 से अधिक संगठनों का समर्थन
देश बचाओ मोर्चा के बैनर तले आयोजित इस आंदोलन में करीब 550 किसान संगठनों और सामाजिक संगठनों के शामिल होने का दावा किया गया है। किसान नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन केवल कृषि का नहीं, बल्कि रोजगार, छोटे व्यापार और देश की खाद्य सुरक्षा से भी जुड़ा मुद्दा है।
किसानों की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
किसान संगठनों का आरोप है कि यदि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क कम किया गया, तो भारतीय बाजार में सस्ते विदेशी उत्पादों की आमद बढ़ जाएगी। इससे छोटे और मध्यम किसानों की आय प्रभावित होगी तथा उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिलना मुश्किल हो जाएगा।
किसानों का यह भी कहना है कि ई-कॉमर्स और डिजिटल ट्रेड से जुड़े कुछ प्रस्ताव भविष्य में कृषि बाजार पर बड़ी कंपनियों की पकड़ मजबूत कर सकते हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों और किसानों को नुकसान होगा।
सरकार पर पारदर्शिता की कमी का आरोप
आंदोलन कर रहे किसान नेताओं का आरोप है कि इतने महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर किसानों और कृषि संगठनों से व्यापक चर्चा नहीं की गई। उनका कहना है कि सरकार को किसी भी अंतिम समझौते से पहले सभी पक्षों से संवाद करना चाहिए और किसानों के हितों की स्पष्ट सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।
दिल्ली की सीमाओं पर बढ़ाई गई सुरक्षा
किसानों के दिल्ली कूच को देखते हुए हरियाणा सरकार ने शंभू बॉर्डर समेत कई सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। वहीं दिल्ली पुलिस ने भी ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर लोगों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी।
आगे और तेज हो सकता है आंदोलन
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लेती और प्रस्तावित समझौते में कृषि एवं डेयरी क्षेत्र के हितों की रक्षा नहीं करती, तो आंदोलन को देशभर में और व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल सभी की नजर केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी है।
