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होर्मुज पर टोल की चर्चा के बीच भारत सख्त- समुद्री रास्ते पर नहीं चलेगी कोई रोक

 
होर्मुज पर टोल की चर्चा के बीच भारत सख्त- समुद्री रास्ते पर नहीं चलेगी कोई रोक
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New Delhi : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टोल लगाने की चर्चाओं के बीच भारत सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। भारत ने कहा है कि इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही निर्बाध और सुरक्षित तरीके से जारी रहनी चाहिए।

भारत ने जताई रणनीतिक चिंता

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत के लिए एक बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जिससे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। सरकार का कहना है कि भारत इस मुद्दे पर अपनी पुरानी नीति पर कायम है और किसी भी तरह की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत लगातार इस बात की वकालत करता रहा है कि इस समुद्री मार्ग पर सभी देशों के जहाजों की सुरक्षित और बिना रुकावट आवाजाही सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक द्विपक्षीय बातचीत नहीं हुई है।

टोल को लेकर स्थिति

रिपोर्ट्स में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाए जाने की चर्चा के बीच भारत ने साफ किया है कि भारतीय ध्वज वाले किसी भी जहाज ने ऐसा कोई भुगतान नहीं किया है। युद्ध की मौजूदा स्थिति के बाद भी भारत के कई एलपीजी टैंकर इस मार्ग से सुरक्षित रूप से वापस लौटे हैं।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है। तेल, गैस, उर्वरक और पेट्रोकेमिकल्स की सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर आता है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

अंतरराष्ट्रीय नियम क्या कहते हैं

संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के अनुसार अधिकांश प्राकृतिक अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर टोल या शुल्क नहीं लगाया जाता, क्योंकि इन्हें वैश्विक साझा मार्ग माना जाता है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों और समझौतों के तहत अपवाद भी मौजूद हैं, जैसे तुर्की में कुछ जलमार्गों पर शुल्क व्यवस्था।

भारत ने साफ संकेत दिया है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के हित में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मुक्त और सुरक्षित नौवहन का समर्थन जारी रखेगा। अब सभी की नजर मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया पर टिकी है।