18 घंटे साइबर फ्रॉड, मना करने पर बिजली के झटके! म्यांमार स्कैम स्कैम कैंप में कैद किए गए भारतीय युवक
थाईलैंड में ₹70 हजार महीने की नौकरी का लालच देकर भारतीय युवाओं को म्यांमार के साइबर स्कैम कैंप में बंधक बनाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ितों से 18 घंटे तक ऑनलाइन ठगी कराई जा रही है और विरोध करने पर बिजली के झटके देकर प्रताड़ित किया जा रहा है।
Myanmar Cyber Scam: विदेश में बेहतर नौकरी और मोटी सैलरी का सपना दिखाकर भारतीय युवाओं को मानव तस्करी के जरिए म्यांमार के साइबर स्कैम कैंपों में भेजे जाने का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के एक युवक ने अपने परिवार को फोन कर बताया कि उसे थाईलैंड में नौकरी का झांसा देकर म्यांमार ले जाया गया, जहां उसे जबरन साइबर फ्रॉड कराने के लिए मजबूर किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, ऐसे कैंपों में सैकड़ों भारतीयों के फंसे होने की आशंका है और मामले की जानकारी विदेश मंत्रालय (MEA) को भी दे दी गई है।
70 हजार महीने की नौकरी का दिया गया था लालच
पुलिस जांच के मुताबिक महाराष्ट्र के बीड जिले का 24 वर्षीय ग्राफिक डिजाइनर सोशल मीडिया पर प्रकाशित एक विज्ञापन के संपर्क में आया था। विज्ञापन में बैंकॉक (थाईलैंड) में ग्राफिक डिजाइन और डेटा एंट्री की नौकरी का ऑफर दिया गया था, जिसके बदले करीब ₹70 हजार मासिक वेतन का वादा किया गया था।
युवक ने विज्ञापन में दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर संपर्क किया। ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे थाईलैंड भेज दिया गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उसे निर्धारित कंपनी ले जाने के बजाय सीमा पार कर म्यांमार के एक साइबर स्कैम कैंप में पहुंचा दिया गया।
16 से 18 घंटे तक कराया जा रहा साइबर फ्रॉड
पीड़ित युवक ने अपने परिवार को बताया कि उसे प्रतिदिन 16 से 18 घंटे तक ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। कैंप में मौजूद लोगों को विदेशी नागरिकों और भारतीयों को निशाना बनाकर निवेश, डिजिटल फ्रॉड और अन्य ऑनलाइन ठगी करने के निर्देश दिए जाते हैं। उसने बताया कि जो लोग आदेश मानने से इनकार करते हैं, उन्हें बेरहमी से प्रताड़ित किया जाता है।
विरोध करने पर बिजली के झटके, बंधक बनाकर रखा गया
परिजनों के अनुसार युवक ने फोन पर बताया कि कैंप में कैद लोगों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है। यदि कोई साइबर फ्रॉड करने से मना करता है तो उसे बिजली के झटके (Electric Shocks) दिए जाते हैं और शारीरिक यातनाएं दी जाती हैं। युवक ने यह भी दावा किया कि उसके साथ करीब 800 भारतीय इसी तरह के कैंपों में फंसे हुए हैं, जिन्हें बाहर निकलने की अनुमति नहीं है।
परिवार की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला
पीड़ित की पत्नी की शिकायत के आधार पर महाराष्ट्र पुलिस ने अज्ञात एजेंटों और भर्ती कराने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उन लोगों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने फर्जी नौकरी का झांसा देकर युवक को विदेश भेजा था।
विदेश मंत्रालय को भेजी गई पूरी जानकारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र पुलिस ने पूरी जानकारी भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) को भेज दी है। भारतीय अधिकारियों के स्तर पर युवक की सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी और साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
जांच एजेंसियों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया और लाओस जैसे देशों में फर्जी नौकरी के नाम पर भारतीय युवाओं को भेजकर साइबर स्कैम सेंटरों में जबरन काम कराने के कई मामले सामने आए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी पहले ऐसे गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है, जो भारत से युवाओं की भर्ती कर उन्हें म्यांमार के स्कैम कैंपों तक पहुंचाते थे।
