ISRO का बड़ा मिशन सफल, 36 हजार किमी ऊपर से भारत पर नजर रखेगा EOS-05, जानिए क्यों है खास
श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और अहम उपलब्धि हासिल की है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 जियोसिंक ऑब्जर्वेटरी सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। सुबह 2:55 बजे हुए इस प्रक्षेपण के साथ भारत को अपना पहला जियोसिंक ऑब्जर्वेटरी मिशन मिला है। यह उपग्रह करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई से भारत के भौगोलिक क्षेत्र की निगरानी और हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग में अहम भूमिका निभाएगा।
क्या है EOS-05 और कैसे करेगा काम?
EOS-05 एक अत्याधुनिक इमेजिंग सैटेलाइट है। इसमें हाई-रेजोल्यूशन कैमरे लगाए गए हैं, जो अंतरिक्ष से धरती की बेहद स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम हैं। करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित होने वाला यह उपग्रह भारत के बड़े भौगोलिक क्षेत्र की लगातार निगरानी कर सकेगा।
बताया गया है कि EOS-05 लगभग हर पांच मिनट में तस्वीरें लेकर उन्हें धरती पर भेज सकेगा। पूरे भारत के अलग-अलग क्षेत्रों की तस्वीरें लेने में इसे करीब 30 मिनट का समय लग सकता है।
EOS-05 की प्रमुख खूबियां
वजन: 2,367 किलोग्राम
ऑर्बिट: करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई
कैमरा: हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग सिस्टम
इमेजिंग: लगभग हर 5 मिनट में तस्वीरें
कवरेज: भारत के बड़े भौगोलिक क्षेत्र की निगरानी
चीन-पाकिस्तान सीमा से लेकर आपदा प्रबंधन तक निगरानी
EOS-05 का महत्व सिर्फ तस्वीरें लेने तक सीमित नहीं है। जियोसिंक ऑर्बिट में स्थापित होने के बाद यह उपग्रह भारत के लिए लगातार निगरानी क्षमता को मजबूत करेगा। खासकर संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों पर नजर रखने में इससे मदद मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा बाढ़, तूफान, भूस्खलन और जंगलों में आग जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी सैटेलाइट से मिलने वाली तस्वीरें राहत और बचाव एजेंसियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।
किसानों और शहरी विकास के लिए भी उपयोगी
EOS-05 से मिलने वाले इमेजिंग डेटा का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में भी किया जा सकता है। सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से फसलों की स्थिति, बुआई और संभावित पैदावार का आकलन करने में सहायता मिल सकती है।
शहरी क्षेत्रों में बढ़ते निर्माण, शहरों के विस्तार और जमीन के इस्तेमाल में हो रहे बदलावों की निगरानी के लिए भी इस तकनीक का उपयोग किया जा सकता है।
ISRO के लिए क्यों अहम है यह लॉन्च?
EOS-05 मिशन की सफलता ISRO के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले कुछ मिशनों में असफलता का सामना करना पड़ा था। इस सफल प्रक्षेपण ने वैज्ञानिकों और मिशन से जुड़े लोगों का उत्साह बढ़ाया।
यह GSLV-F17 की 19वीं उड़ान थी। इस मिशन में जियोसिंक्रोनस/जियोसिंक पेलोड को अंतरिक्ष में पहुंचाया गया। इसके लिए करीब चार मीटर व्यास वाले OGIVE कंपोजिट पेलोड फेयरिंग का इस्तेमाल किया गया।
लॉन्च देखने पहुंचे छात्र, सफलता पर दिखी खुशी
EOS-05 के प्रक्षेपण को देखने के लिए सतीश धवन स्पेस सेंटर में बड़ी संख्या में स्कूल और कॉलेज के छात्र भी मौजूद रहे। देर रात हुए लॉन्च के दौरान जैसे ही मिशन की सफलता की पुष्टि हुई, वैज्ञानिकों के साथ वहां मौजूद दर्शकों में भी उत्साह देखने को मिला।
