Chandrayaan-3 लॉन्च करने वाला ISRO का ‘बाहुबली’ रॉकेट अब प्राइवेट सेक्टर को मिलेगा
LVM3 Privatization: भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। Chandrayaan-3 मिशन को चंद्रमा तक पहुंचाने वाले और देश के सबसे शक्तिशाली रॉकेट Launch Vehicle Mark-III (LVM3) को अब निजी क्षेत्र को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) ने इस दिशा में एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी कर भारतीय कंपनियों को आमंत्रित किया है।
यह फैसला भारत के स्पेस सेक्टर में अब तक के सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जा रहा है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष प्रक्षेपण सेवाओं में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना और ISRO को भविष्य के महत्वाकांक्षी मिशनों पर फोकस करने का अवसर देना है।
क्या है LVM3, जिसे कहा जाता है भारत का ‘बाहुबली’ रॉकेट?
LVM3 भारत का सबसे शक्तिशाली और भारी पेलोड ले जाने वाला लॉन्च व्हीकल है। इसकी क्षमता और प्रदर्शन के कारण इसे अक्सर भारत का ‘बाहुबली रॉकेट’ कहा जाता है।
इस रॉकेट ने कई महत्वपूर्ण उपग्रहों को अंतरिक्ष में स्थापित किया है। वर्ष 2023 में इसी रॉकेट ने Chandrayaan-3 को सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह तक पहुंचाकर दुनिया भर में भारत की तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाया था।
इसके अलावा OneWeb सैटेलाइट मिशन जैसे कई अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट भी LVM3 के जरिए लॉन्च किए जा चुके हैं, जिससे इसकी व्यावसायिक क्षमता भी साबित हो चुकी है।
निजी कंपनियों को क्या सौंपा जाएगा?
IN-SPACe द्वारा जारी EOI के अनुसार, चयनित निजी कंपनी या कंपनियों के समूह को LVM3 के निर्माण, संचालन और व्यावसायिक उपयोग की जिम्मेदारी दी जाएगी।
ISRO इस प्रक्रिया में चुनी गई कंपनी को तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन देगा। यह सहयोग 42 महीने तक या तब तक जारी रहेगा जब तक कंपनी दो LVM3 रॉकेट का सफल निर्माण और प्रक्षेपण नहीं कर लेती। सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में भारतीय कंपनियां स्वतंत्र रूप से लॉन्च सेवाएं प्रदान कर सकें और वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ा सकें।
किन कंपनियों को मिलेगा मौका?
EOI के अनुसार केवल स्थापित भारतीय कंपनियां ही इस प्रक्रिया में भाग ले सकेंगी।
आवेदन करने वाली कंपनी को कम से कम सात वर्षों से संचालित होना चाहिए और स्पेस या एयरोस्पेस क्षेत्र में कम से कम पांच वर्षों का अनुभव होना आवश्यक है।
इसके अलावा कंपनी का औसत वार्षिक कारोबार पिछले पांच वर्षों में कम से कम 800 करोड़ रुपये होना चाहिए या उसका मूल्यांकन 2,000 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बड़े पैमाने की इंजीनियरिंग परियोजनाओं और जटिल सप्लाई चेन संचालन का अनुभव रखने वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
क्या गगनयान मिशन वाला रॉकेट भी होगा शामिल?
LVM3 का मानवयुक्त संस्करण भारत के महत्वाकांक्षी Gaganyaan Mission के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसके जरिए भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मानव मिशन के लिए तैयार किए गए इस विशेष संस्करण को भी निजी क्षेत्र को सौंपा जाएगा या नहीं।
आखिर ISRO यह कदम क्यों उठा रहा है?
सरकार की नई स्पेस नीति के तहत ISRO की भूमिका को पुनर्परिभाषित किया जा रहा है। अब ISRO का ध्यान केवल लॉन्च सेवाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह भविष्य के बड़े मिशनों जैसे Gaganyaan, Chandrayaan-4, Chandrayaan-5, Venus Mission और उन्नत पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रमों पर फोकस करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परिपक्व लॉन्च सिस्टम निजी क्षेत्र को सौंप दिए जाते हैं, तो ISRO अपनी वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं का उपयोग अगली पीढ़ी की अंतरिक्ष परियोजनाओं में कर सकेगा।
भारत के स्पेस सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
हाल के वर्षों में भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी निवेश के लिए खोलने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इससे पहले ISRO का Small Satellite Launch Vehicle (SSLV) भी निजी क्षेत्र को हस्तांतरित किया जा चुका है।
LVM3 का निजीकरण इस प्रक्रिया को एक नए स्तर पर ले जाएगा। इससे भारत में निजी स्पेस कंपनियों को वैश्विक लॉन्च बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलेगा और देश की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में नए युग की शुरुआत
दुनिया भर में सैटेलाइट लॉन्च की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में भारत अपने लॉन्च वाहनों के जरिए वैश्विक बाजार में बड़ी भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है।
यदि LVM3 का हस्तांतरण सफल रहता है, तो Chandrayaan-3 को लॉन्च करने वाला यह ऐतिहासिक रॉकेट भविष्य में भारत का प्रमुख व्यावसायिक लॉन्च वाहन बन सकता है।
यह कदम न केवल ISRO के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा, बल्कि भारतीय निजी अंतरिक्ष उद्योग को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
