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अमेरिका और चीन की प्रतिस्पर्धा पर जयशंकर की दो टूक, बोले- दुनिया अब नए विकल्प तलाश रही

 
अमेरिका और चीन की प्रतिस्पर्धा पर जयशंकर की दो टूक, बोले- दुनिया अब नए विकल्प तलाश रही
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New Delhi/Munich : विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बदलती वैश्विक व्यवस्था को लेकर अमेरिका और चीन की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि दुनिया की मौजूदा परिस्थितियां अमेरिका की बदली हुई स्थिति, चीन के उदय और उभरती एवं मध्यम शक्तियों की बढ़ती आत्मनिर्भरता से प्रभावित हो रही हैं। जयशंकर ने ये बातें म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस के दौरान कहीं। विदेश मंत्रालय के दस्तावेज भी 2026 में जयशंकर की म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में भागीदारी की पुष्टि करते हैं।

जयशंकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ उभरती एवं मध्यम शक्तियों की अधिक रणनीतिक स्वायत्तता, साझेदारियों में विविधता और जोखिम कम करने के प्रयासों से आकार ले रही है।

अमेरिका की बदली भूमिका का किया जिक्र

विदेश मंत्री ने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में अमेरिका की बदली हुई भूमिका शामिल है। उनके मुताबिक, अमेरिका अब अधिक स्वतंत्र रूप से अपने हितों और शक्ति के आधार पर फैसले ले रहा है।

उन्होंने अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को वैश्विक व्यवस्था में आ रहे बदलाव का महत्वपूर्ण कारण बताया।

‘चीन का उदय भी बड़ा पहलू’

जयशंकर ने चीन के बढ़ते आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू चीन का उदय है। उन्होंने वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में चीन की बड़ी हिस्सेदारी और उसकी आर्थिक क्षमताओं के राजनीतिक प्रभाव में बदलने का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा का असर केवल इन दोनों देशों तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव दूसरे देशों की आर्थिक और रणनीतिक नीतियों पर भी पड़ रहा है।

उभरती और मध्यम शक्तियां तलाश रहीं नए विकल्प

विदेश मंत्री के मुताबिक, उभरती और मध्यम शक्तियां अपने आर्थिक और सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए अधिक आत्मनिर्भरता, मजबूत सप्लाई चेन, साझेदारियों में विविधता और जोखिम कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में देशों के लिए साथ काम करने के लिए हर मुद्दे पर पूरी तरह समान विचार रखना जरूरी नहीं है। पर्याप्त साझा हित होने पर अलग-अलग दृष्टिकोण रखने वाले देश भी एक-दूसरे के साथ सहयोग कर सकते हैं।

QUAD और BRICS का दिया उदाहरण

जयशंकर ने अपनी बात के समर्थन में QUAD और BRICS जैसे समूहों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उभरती और मध्यम शक्तियां आपस में सहयोग करने के साथ अमेरिका और चीन दोनों के साथ संबंध बनाए रख सकती हैं, बशर्ते उनके मूल हितों में सीधा टकराव न हो।

कनेक्टिविटी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC), इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और नॉर्दर्न सी रूट का भी जिक्र किया।

इसके अलावा उन्होंने भारत के नेतृत्व वाली इंटरनेशनल सोलर अलायंस और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए इन्हें बदलती वैश्विक व्यवस्था में नए प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सहयोग के उदाहरण के रूप में पेश किया।