25 दिन में मंत्री पद से इस्तीफा… 89 करोड़ के वाल्मीकि निगम मामले में बी नागेंद्र पर क्या है आरोप?
Valmiki Corporation Scam: कर्नाटक में कथित वाल्मीकि निगम घोटाले को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कैबिनेट से योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने इस्तीफा दे दिया है। नागेंद्र ने 28 अगस्त को भावुक होकर अपने फैसले का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वह पार्टी को किसी तरह की परेशानी या शर्मिंदगी में नहीं डालना चाहते, इसलिए स्वेच्छा से पद छोड़ रहे हैं।
नागेंद्र को शिवकुमार मंत्रिमंडल में 3 अगस्त 2026 को दोबारा शामिल किया गया था। यानी करीब 25 दिन बाद ही उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा। यह दूसरी बार है जब वाल्मीकि निगम मामले को लेकर उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा है। इससे पहले जून 2024 में भी उन्होंने तत्कालीन सिद्धारमैया सरकार में आदिवासी कल्याण मंत्री रहते हुए इस्तीफा दिया था।
क्या है 89 करोड़ का वाल्मीकि निगम मामला?
मामला कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के फंड में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार निगम के खाते से करीब 89.63 करोड़ रुपये कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और बैंकिंग लेनदेन के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर किए गए। जांच में करीब 600 बैंक खातों के जरिए रकम को अलग-अलग लेनदेन में घुमाने के आरोप सामने आए हैं।
यह मामला मई 2024 में उस समय सामने आया था, जब निगम के अकाउंट्स सुपरिटेंडेंट पी. चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली थी। उनके पीछे छोड़े गए नोट में निगम के पैसों में कथित अनियमितताओं और अधिकारियों पर दबाव के आरोप लगाए गए थे। इसके बाद राज्य की SIT, ED और CBI ने मामले की अलग-अलग स्तर पर जांच की।
ED और CBI की जांच में नागेंद्र पर क्या आरोप?
जांच एजेंसियों ने नागेंद्र की कथित भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ED ने आरोप लगाया था कि निगम का बैंक खाता एक खास शाखा में स्थानांतरित कराने में उनके प्रभाव का इस्तेमाल हुआ और करीब 89.63 करोड़ रुपये की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश में उनकी भूमिका थी। CBI की चार्जशीट में भी नागेंद्र समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं। हालांकि, ये जांच एजेंसियों के आरोप हैं और अदालत में अंतिम रूप से साबित नहीं हुए हैं।
जांच एजेंसियों ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित तौर पर डायवर्ट की गई रकम में से करीब 20.19 करोड़ रुपये का इस्तेमाल 2024 लोकसभा चुनाव से जुड़ी गतिविधियों में किया गया। इस मामले में आगे की जांच जारी है।
विपक्ष ने बताया सरकार का पहला विकेट
नागेंद्र के इस्तीफे के बाद भाजपा ने इसे कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपने आंदोलन की जीत बताया है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने इसे डीके शिवकुमार सरकार का "पहला विकेट" बताया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि नागेंद्र इस मामले में सिर्फ "छोटी मछली" हैं और असली बड़े खिलाड़ियों का अभी सामने आना बाकी है।
वहीं, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नागेंद्र का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने मामले को देखा है और नागेंद्र खुद को निर्दोष मानते हैं। नागेंद्र ने भी अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है।
