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LPG के दाम फिर बढ़े: कॉमर्शियल सिलेंडर 3000 के पार, आम जनता पर भी पड़ेगा असर

देश में कॉमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर के दाम में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई है, जबकि 5 किलो मिनी सिलेंडर भी महंगा हुआ है। इसका असर होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर पड़ेगा। हालांकि पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमतें फिलहाल स्थिर रखी गई हैं।

 
LPG Price Hike
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LPG Price Hike: देश में एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में 993 रुपये की तेज बढ़ोतरी हुई है, जबकि 5 किलोग्राम के छोटे सिलेंडर (मिनी या छोटू सिलेंडर) के दाम 261 रुपये बढ़ा दिए गए हैं।
 
दिल्ली-मुंबई में नई कीमतें

नई दरों के अनुसार, राजधानी दिल्ली में 19 किलो कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत अब 3071.50 रुपये हो गई है। वहीं मुंबई में इसकी कीमत करीब 3024 रुपये पहुंच गई है। 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर की कीमत दिल्ली में करीब 339 रुपये के आसपास है और अन्य शहरों में भी इसी तरह की दरें लागू हैं।

लगातार दूसरे महीने बढ़े दाम

गौरतलब है कि इससे पहले पिछले महीने भी कॉमर्शियल और छोटे गैस सिलेंडरों की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। लगातार हो रही इस वृद्धि से कारोबारी वर्ग पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

रेस्टोरेंट और होटल कारोबार पर असर

कॉमर्शियल गैस सिलेंडर महंगे होने का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, बेकरी और अन्य खाद्य व्यवसायों पर पड़ेगा। आमतौर पर ऐसे मामलों में कारोबारी बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालते हैं, जिससे आने वाले दिनों में बाहर खाना महंगा हो सकता है।

एविएशन फ्यूल की कीमतों में नहीं हुआ बदलाव

इस बीच, घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। तेल कंपनियों ने वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी का असर खुद वहन करते हुए उपभोक्ताओं को राहत दी है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन महंगा किया गया है।

पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस की कीमतें स्थिर

तेल कंपनियों के अनुसार, आम जनता से जुड़े ईंधनों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पेट्रोल, डीजल और 14.2 किलोग्राम घरेलू गैस सिलेंडर की दरें स्थिर रखी गई हैं। करीब 33 करोड़ उपभोक्ताओं को इसका सीधा लाभ मिल रहा है।

कुल उत्पादों में सीमित बदलाव

आंकड़ों के अनुसार, लगभग 80 प्रतिशत पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। करीब 4 प्रतिशत उत्पाद सस्ते हुए हैं, जबकि 16 प्रतिशत उत्पाद—ज्यादातर औद्योगिक उपयोग वाले—महंगे हुए हैं।

वैश्विक कीमतों के बीच संतुलन की कोशिश

तेल कंपनियों का कहना है कि यह निर्णय वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर कम पड़े और आर्थिक संतुलन बना रहे।