Movie prime

Lunar Eclipse 2026: आज लाल रंग में नजर आएगा चांद, जानिए भारत में कब और कहां दिखेगा पूर्ण चंद्र ग्रहण

मंगलवार को वर्ष 2026 का महत्वपूर्ण पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। दोपहर 3:20 से शाम 6:48 बजे तक चलने वाले इस खगोलीय नजारे में चंद्रमा लालिमा लिए ‘ब्लड मून’ के रूप में नजर आएगा। भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में इसका अंतिम चरण देखा जा सकेगा।

 
Lunar Eclipse 2026
WhatsApp Channel Join Now
Instagram Profile Join Now

Lunar Eclipse 2026: भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में मंगलवार को वर्ष 2026 का महत्वपूर्ण पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा। यह खगोलीय घटना भारतीय समयानुसार दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:48 बजे तक चलेगी। ग्रहण की पूर्ण अवस्था 4:34 बजे से 5:33 बजे के बीच रहेगी, जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में समा जाएगा।

क्यों खास है यह चंद्र ग्रहण?

पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया सीधे चंद्रमा पर पड़ती है। यह घटना केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव होती है, जब तीनों खगोलीय पिंड लगभग एक सीधी रेखा में होते हैं।

जब चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया, जिसे ‘उम्ब्रा’ कहा जाता है, में प्रवेश करता है तो वह लालिमा लिए दिखाई देता है। इसी कारण इसे आम भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।

चंद्रमा लाल क्यों दिखता है?

पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा का लाल या नारंगी दिखाई देना एक वैज्ञानिक प्रक्रिया का परिणाम है। जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरता है, तो नीली रोशनी अधिक बिखर जाती है, जबकि लाल और नारंगी रंग की रोशनी कम बिखरती है। यही लाल प्रकाश मुड़कर चंद्रमा तक पहुंचता है और उसे रक्तिम आभा प्रदान करता है। यही कारण है कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय भी आकाश लाल या नारंगी दिखता है।

भारत में कहां और कितना दिखेगा?

भारत के अधिकांश हिस्सों में यह पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखाई देगा, हालांकि कई क्षेत्रों में लोग इसका अंतिम चरण ही देख पाएंगे क्योंकि चंद्रमा उसी समय उदित होगा।

पूर्वोत्तर भारत और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में चंद्रमा अपेक्षाकृत पहले उदय होगा, जिससे वहां पूर्ण अवस्था की अंतिम झलक देखी जा सकेगी। दक्षिण भारत के शहरों जैसे चेन्नई और कन्याकुमारी में यह दृश्य लगभग 30 मिनट तक साफ दिखाई दे सकता है।

दुनिया के किन हिस्सों में दिखेगा ‘ब्लड मून’?

अनुमान है कि विश्व की लगभग 40 प्रतिशत आबादी इस पूर्ण चंद्र ग्रहण का कम से कम एक चरण देख सकेगी। यह एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और यूरोप के कुछ हिस्सों में अलग-अलग चरणों में नजर आएगा। खगोल विज्ञान के शौकीनों और शोधकर्ताओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है, क्योंकि ऐसा संयोग अब 2028 के बाद ही बनेगा।